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एईएस मरीज का पीएचसी में होगा पहला इलाज, रेफर करने पर होगी सख्त कार्रवाई

deltin33 1 hour(s) ago views 344
  

Chamki Fever Action: 24 घंटे रोस्टर के अनुसार डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती रहती है। फाइल फोटो  



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur AES Control: एईएस (चमकी बुखार) को लेकर जिला स्तर पर गठित मेडिकल एक्सपर्ट कमेटी की बैठक में इस साल की रोकथाम और इलाज की रणनीति तय की गई।

बैठक में शामिल विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि इस बार भी पिछले वर्ष के तय प्रोटोकॉल के अनुसार ही इलाज किया जाएगा, इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

मेडिकल एक्सपर्ट कमेटी ने निर्णय लिया कि एईएस से पीड़ित बच्चों का पहला इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) स्तर पर ही किया जाएगा। बिना प्राथमिक उपचार के मरीजों को रेफर करने पर संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गोपालशंकर सहनी ने बताया कि यदि मुख्यालय स्तर से कोई नया निर्देश या सुझाव आता है, तो उसे आगे जोड़ा जाएगा। फिलहाल मौजूदा प्रोटोकॉल के अनुसार ही इलाज होगा।

उन्होंने बताया कि एसकेएमसीएच में 100 बेड का पीकू वार्ड चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों के लिए पूरी तरह तैयार रखा गया है। यहां 24 घंटे रोस्टर के अनुसार डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती रहती है।

सिविल सर्जन डॉ. अजय कुमार ने कहा कि पीएचसी से लेकर मातृ-शिशु अस्पताल तक एईएस मरीजों के लिए अलग से बेड की व्यवस्था की जाएगी।

पीएचसी स्तर पर 33 से अधिक प्रकार की आवश्यक दवाएं और उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें बेड, ग्लूकोमीटर, थर्मामीटर सहित प्रोटोकॉल में शामिल सभी जरूरी दवाएं शामिल हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों से पीड़ित बच्चों को निजी साधन या बाइक से अस्पताल पहुंचाने पर 400 से 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है। आशा कार्यकर्ता अपने पोषक क्षेत्र में बुखार से पीड़ित बच्चों पर नजर रखेंगी।

तेज बुखार के साथ चमकी के लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल भेजने का निर्देश दिया गया है। साथ ही जीविका दीदियों और आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
विशेष सलाह (Advisory)

  • बच्चों को भूखे पेट न सुलाएं और सुबह उनकी स्थिति पर नजर रखें।
  • तेज धूप में बच्चों को जाने से रोकें।
  • तेज बुखार या चमकी के लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल ले जाएं।
  • सरकारी अस्पतालों में एईएस का इलाज पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध है।
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