जागरण संवाददाता, उरई। रेलवे के ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन (कर्षण विभाग) के तीन जिम्मेदारों के पकड़े जाने के बाद अब रेलवे के अन्य उन सेक्शन (विभाग) में दहशत का माहौल है जिनमें ठेका भर्ती का सिस्टम है। सीबीआइ के छापे के बाद दहशत इतनी बढ़ गई है कि कर्मचारी या तो फोन नहीं उठा रहे हैं और अगर उठा रहे हैं तो बात करने से कतरा रहे हैं। वैसे कर्मचारियों को निर्धारित से कम मानदेय, वेतन देना और ज्यादा काम लिया जाना आम है। यही कारण है कि जिन विभागों में इस तरह की व्यवस्था है उनमें भी सतर्कता शुरू हो गई है।
रेलवे में नियमित कर्मचारियों की पूरी व्यवस्था न होने की वजह से आउटसोर्सिंग पद्धति से कुछ कर्मचारी काम पर रखे जाते हैं। ट्रैक्शन, टेलीकाम, पथ, सफाई आदि इनमें शामिल हैं। अभी हाल में कुछ सफाई कर्मचारियों ने आठ हजार रुपये कम होने की बात डीआरएम अनिरुद्ध कुमार से उनके निरीक्षण के दौरान कही थी। जिस पर उन्होंने पे-रोल जारी करने और उसी के आधार पर ठेकेदार को भुगतान की बात कही। हालांकि अन्य विभागों में इससे अधिक भुगतान किया जाता है। यही कारण है कि उस पर नियुक्ति पाने के लिए अभ्यर्थियों को जेब ढीली करनी पड़ती हैं। कुछ मासिक तौर पर कम वेतन उठाते हैं, लेकिन इसकी शिकायतें सामने न आने की वजह से लगातार खेल जारी रहा।
कर्षण विभाग में अधिकारी इतने मद में चूर हो गए कि उन्हें ख्याल नहीं रहा कि वे कर क्या रहे हैं और इसकी परिणति क्या हो सकती है। 23 हजार के वेतन पर 20 हजार अलग से और 13 हजार प्रतिमाह की जब डिमांड की गई तो कर्मचारी परेशान हो गया और उसने शिकायत कर दी। सीबीआइ ने डीइइ, एसएसइ और टेक्शीनियन को धर दबोचा। इनमें एसएसइ तो रंगे हाथ पकड़े गए। जिस तरह से कर्मचारी ने अपनी आवाज बुलंद की उससे अन्य विभाग भी सतर्क हो गए हैं।
स्थिति यह है कि अब सीबीआइ द्वारा फोन टैपिंग किए जाने की आशंका से वे बात करने से भी कतरा रहे हैं। यही नहीं विभागों में जानकारी देने में भी आनाकानी की जा रही है। यही नहीं विभागों के जिम्मेदारों को भी यह डर सता रहा है कि कहीं उनके विभाग की भी जांच न हो जाए और कर्मचारी अंदरखाने ही सही परंतु कोई जानकारी लीक न कर दें।
छह डिपो का इंचार्ज होने का रुतबा ही अलग
मंडलीय विद्युत इंजीनियर (कर्षण वितरण) शांतनु यादव को भी सीबीआइ ने पकड़ा है। उन पर उरई, पुखरायां, घाटमपुर, डिगबाई, भरुआ सुमेरपुर, शिवरामपुर डिपो का चार्ज था। ऐसे में उनका क्षेत्र काफी बड़ा था और इसका असर था कि वह रुतबा अलग ही दिखाते थे। सूत्र बताते हैं कि अपने बंगले को सजवाने के लिए तो उन्होंने एक बड़े रेलवे अधिकारी को फोन घुमा दिया था। रेस्ट हाउस में लगातार रुके रहे। कर्मचारियों में उनको लेकर खासा खौफ था। उनके नाम को लेकर एसएसइ भगवान सिंह पाल और टेक्नीशियन प्रकाश कुशवाहा कर्मचारियों पर दबाव बनाते थे।
एसएसइ-पीडब्ल्यूआइ की बिगड़ी तबियत
रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार एसएसइ (पीडब्लूआइ) यानी सीनियर सेक्शन इंजीनियर (ट्रैक) नीरज कुमार की तबियत इतनी खराब हो गई है कि उनको झांसी के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी नाजुक हालत की वजह से उन्हें आइसीयू में भर्ती कराया गया है। यह तो साफ नहीं हो पाया है कि उनको क्या बीमारी थी, जिसकी वजह से तबियत इतनी बिगड़ गई है। फिर भी बताया जा रहा है कि शायद उनको नींद आने में समस्या थी, जिसकी दवाएं उन्होंने अधिक खा लीं। झांसी में होने की वजह से उनके स्वजन से भी बात नहीं हो पाई।
टेक्नीशियन की धमक के आगे फीके थे सभी
रिश्वत प्रकरण में टीआरडी के डीडीइ शांतनु यादव, एसएसइ भगवान सिंह पाल और टेक्नीशियन प्रकाश कुशवाहा को पकड़ा गया है। रेलवे के सूत्र बताते हैं कि टेक्नीशियन प्रकाश कुशवाहा ने डीडीइ के साथ बेहतर तालमेल बैठा रखा था और उसका कद काफी ऊंचा हो गया था। वर्ष 2013 में प्रकाश कुशवाहा पिता के स्थान अनुकंपा नियुक्ति पर बतौर हेल्पर नियुक्त हुआ था और 13 वर्षों की नौकरी में उसकी पदोन्नति हुई। डीडीइ शांतनु यादव का वह हमसाया बन चुका था। भगवान सिंह पाल भी इस काकस में शामिल हुए। स्थिति यह थी कि प्रकाश और भगवान सिंह ही लेन-देन का काम करते थे। प्रकाश कुशवाहा के शौक भी उसकी नौकरी की तुलना में कुछ अधिक ही नजर आते हैं। अब सीबीआइ द्वारा पकड़े जाने के बाद रेलवे के कर्मचारी कई तरह की चर्चा कर रहे हैं।
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