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मृतक शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। आत्महत्या करने वाले शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह के परिवार ने इस पूरे मामले की सीबीआइ जांच की मांग उठाई है। परिजनों को भरोसा नहीं कि शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के संरक्षण में हुई इस वारदात की निष्पक्ष जांच पुलिस व प्रशासन नहीं कर पाएगा। मृतक ने अपने सुसाइड नोट में भी यही मांग की थी कि इस मामले की जांच सीबीआइ से कराई जाए।
कृष्ण मोहन की पत्नी गुड़िया सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है। उनके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं- आठ वर्षीय बेटी आस्था और छह वर्षीय बेटा आदित्य। गुड़िया सिंह ने कहा, \“मेरे पति को इन लोगों ने जान से मार दिया। हमने अपने गहने गिरवी रखे, रिश्तेदारों से उधार लिया, 16 लाख रुपये दे दिए। फिर भी इनकी भूख नहीं मरी। अब हमें इंसाफ चाहिए। लेकिन हमें डर है कि कहीं अफसरों की मिलीभगत से यह केस दब न जाए। इसलिए हम चाहते हैं कि सीबीआइ जांच हो।
चार पेज के सुसाइड नोट में कृष्ण मोहन सिंह ने साफ लिखा था, \“मैं आज माननीय मुख्यमंत्री जी से प्रार्थना करता हूं। इन अधिकारियों की जांच सीबीआइ द्वारा होनी चाहिए और यह भी कहा जाए कि बेईमानों को बख्शा न दिया जाए। जिससे कि हमारे जैसे दीन-दुखियों को यह सब न देखना पड़े।
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सुसाइड नोट में उन्होंने यह भी लिखा था कि उनके विद्यालय की भी गहन जांच की जाए क्योंकि वहां न तो बच्चे हैं और न ही पढ़ाई होती है। परिजनों का कहना है कि बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह अकेले नहीं हैं। उन्हें शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है।
यही वजह है कि वे इतने बड़े पैमाने पर रिश्वत वसूली कर रहे थे। देवरिया जिले में कई शिक्षक ऐसे हैं जिनसे रुपये ऐंठे गए हैं। हम चाहते हैं कि पूरे नेटवर्क की जांच हो। बीएसए उनके बाबू और सहयोगियों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा है। |
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