search

गोरखपुर में स्मार्ट मीटर के नाम पर वसूली का खेल, पुराने मीटर की रीडिंग कम करने के बहाने कर रहे ठगी

deltin33 1 hour(s) ago views 939
  

स्मार्ट मीटर लगाने वाले कर्मचारी स्टोर रीडिंग खत्म करने के नाम पर ले रहे रुपये। जागरण  



दुर्गेश त्रिपाठी, गोरखपुर। शाहपुर थाना क्षेत्र के चुन्नीपुर में उमा देवी के नाम से बिजली कनेक्शन है। इस कनेक्शन पर इलेक्ट्रानिक मीटर लगा था। दो दिन पहले कुछ लोग गए और बताया कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। अब कनेक्शन पर स्मार्ट मीटर ही लगाया जाएगा। परिवार के लोगों ने तत्काल इसकी अनुमति दे दी।

इसके बाद कर्मचारियों ने स्मार्ट मीटर लगाया। पुराना मीटर उतारते समय बताया कि पहले से छह सौ यूनिट रीडिंग स्टोर है। यदि इसका बिल बनेगा तो पांच हजार रुपये से ज्यादा होगा। आप तीन हजार रुपये दे दीजिए, पुराना बकाया खत्म कर दूंगा। इसके बाद स्मार्ट मीटर की रीडिंग के आधार पर मोबाइल फोन नंबर पर बिल आएगा। मोलभाव कर दो हजार रुपये में बात पक्की हुई।  

इसी तरह राप्तीनगर क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने गए कर्मचारी ने पुराने मीटर की स्टोर रीडिंग खत्म करने के लिए 20 हजार रुपये मांगे। बताया कि स्टोर रीडिंग के आधार पर 40 हजार रुपये का बिल बनेगा। बाद में 15 हजार रुपये में मामला तय हुआ।  

गोरखपुर-बस्ती मंडल में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर के नाम पर वसूली का खेल जमकर चल रहा है। पुराने मीटर की स्टोर रीडिंग खत्म करने के लिए स्मार्ट मीटर लगाने पहुंच रहे कर्मचारी खुलकर रुपये मांग रहे हैं। बता रहे हैं कि जितनी रीडिंग स्टोर है, उसके हिसाब से हजारों रुपये का बिल बनेगा।

मीटर रीडिंग व्यवस्था ध्वस्त होने का उठा रहे फायदा
गोरखपुर जोन में मीटर रीडिंग की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। मीटर रीडिंग न होने के कारण उपभोक्ताओं के परिसर में स्थापित इलेक्ट्रानिक मीटर में रीडिंग लगातार स्टोर होती जा रही है। जब मीटर बदलने के लिए कर्मचारी आ रहे हैं तो इसी स्टोर रीडिंग के नाम पर वसूली का खेल शुरू कर दे रहे हैं।

यह भी पढ़ें- गोरखपुर के पांडेयहाता में बनेगा नगर निगम का शापिंग कांप्लेक्स, 25 करोड़ की लागत से होगा निर्माण



करोड़ों रुपये वसूल चुके हैं
बिजली निगम के अभियंता का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने पहुंचने वाले कर्मचारी स्टोर रीडिंग के नाम पर करोड़ों रुपये वसूल चुके हैं। उपभोक्ता ज्यादा फायदा के चक्कर में फंस जा रहे हैं।

जांच होते ही दर्ज हो जाएगी पुरानी रीडिंग
बिजली निगम के अभियंताओं का कहना है कि पुराने मीटर में स्टोर रीडिंग को भले ही स्मार्ट मीटर वाले कर्मचारी कम कर दर्ज कर दे रहे हैं लेकिन इस रीडिंग को खत्म करना आसान नहीं है। बिना मीटर की जांच बिजली निगम स्मार्ट मीटर लगाने वाले कर्मचारियों की रिपोर्ट को नहीं मानता है।

यह रिपोर्ट प्रयोगशाला में मीटर में दर्ज रीडिंग को देखने के बाद दी जाती है। प्रयोगशाला से दी गई रिपोर्ट के आधार पर मीटर में दर्ज यूनिट को पेपर में दर्ज किया जाता है। फिर बिजली का बिल बनाया जाता है।

अभियंताओं का कहना है कि मीटर लगाने वाले कर्मचारी, जांच करने वाले जूनियर मीटर परीक्षक, अवर अभियंता मीटर और सहायक अभियंता मीटर की मिलीभगत हो तो ही रीडिंग में खेल किया जा सकता है। ज्यादातर मामलों में भले ही कर्मचारी रुपये वसूल लेते हैं लेकिन पुराने मीटर की वास्तविक रीडिंग दर्ज कर बिजली का बिल बनाया जाता है। इसके बाद उपभोक्ताओं को ठगे जाने की जानकारी होती है।




पुराने मीटर की रीडिंग खत्म करने का दावा पूरी तरह गलत होता है। उपभोक्ताओं को किसी ऐसे कर्मचारी के झांसे में नहीं आना चाहिए। किसी कर्मचारी को रीडिंग कम करने के नाम पर जो रुपये देंगे उनका फंसना तय है। हम लोग कई उपभोक्ताओं का हजारों रुपये वापस भी कर चुके हैं और ऐसा करने वाले कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है। उपभोक्ता खुद सचेत रहें और रीडिंग खत्म करने, मीटर लगाने के नाम पर यदि कोई रुपये मांग रहा है मेरे मोबाइल नंबर- 8527729889 पर जरूर सूचना दें।
-

-राकेश सिंह, प्रबंधक, जीनस
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4710K

Credits

administrator

Credits
475537