पुलिस कर्मचारियों ने स्कूल की दीवार फांदकर खुलवाया स्कूल गेट पर अंदर से लगा ताला (फोटो: जागरण)
जागरण संवाददाता, करनाल। 10वीं बोर्ड परीक्षा के पहले ही दिन एक ऐसी अव्यवस्था सामने आई, जिसने बच्चों और अभिभावकों की सांसें रोक दीं। विद्यार्थियों से परीक्षा फार्म में अंग्रेजी कम्यूनिकेटिव का कोड भरवाया गया था। महीनों से उसी सिलेबस के अनुसार तैयारी भी करवाई गई।
लेकिन जब परीक्षा केंद्र पर प्रश्न-पत्र बांटे गए तो वह अंग्रेजी लिटरेचर का निकला। पेपर देखते ही बच्चों के होश उड़ गए। कक्षाओं के भीतर अचानक फुसफुसाहट, घबराहट और फिर विरोध की आवाजें गूंजने लगीं। कई छात्र रो पड़े।
उनका कहना था कि उन्होंने कम्यूनिकेटिव की तैयारी की है, लिटरेचर के प्रश्न उनके लिए बिल्कुल अलग हैं। स्थिति बिगड़ती देख स्कूल प्रबंधन ने बाहर से दोनों गेटों पर ताला जड़ दिया। स्थिति को संभालने का प्रयास किया गया। बच्चों ने कहा कि इस पेपर में तो वो फेल हो जाएंगे।
इस हंगामे का खामियाजा प्राइमरी कक्षाओं के छोटे बच्चों को भी भुगतना पड़ा। उनकी छुट्टी का समय पौने 12 बजे तय था, लेकिन गेट बंद होने के कारण वे स्कूल परिसर में ही फंसे रहे। अभिभावक समय पर पहुंचे तो गेट पर ताला देखकर भड़क उठे।
अभिभावकों का आरोप है कि परीक्षा के विवाद को दबाने के लिए प्रबंधन ने जानबूझकर गेट बंद किए। कई अभिभावकों ने कहा कि हमारे तो होश उड़ गए थे। अंदर क्या हो रहा है, इसकी कोई जानकारी नहीं दी जा रही थी। यह स्कूल संचालक की मनमानी है।
मामला बढ़ने पर पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर चौकी इंचार्ज गीता भी पहुंचीं, लेकिन आरोप है कि प्रबंधन ने तुरंत गेट नहीं खोला। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि एक पुलिसकर्मी को दीवार फांदकर अंदर जाना पड़ा और तब जाकर दरवाजा खुलवाया गया।
करीब डेढ़ घंटे बाद प्राइमरी के बच्चों को बाहर निकाला गया। तब तक अभिभावकों का गुस्सा चरम पर था। कई अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि बोर्ड जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में ऐसी लापरवाही बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
पूरे घटनाक्रम पर स्कूल प्रबंधन कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ। न तो कोड की गड़बड़ी पर कोई स्पष्ट जवाब दिया गया और न ही गेट बंद करने के निर्णय पर। इससे अभिभावकों में और रोष फैल गया। फिलहाल अभिभावक शिक्षा विभाग से जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी बच्चे को ऐसी मानसिक पीड़ा से न गुजरना पड़े। |
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