दिल्ली नगर निगम का कार्यालय।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के तीनों कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के लिए तीसरे चरण के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में अब दूसरे चरण के तहत ही चल रहे काम का विस्तार किया जाएगा।
31 मार्च को खत्म हो रही समय-सीमा पर वर्तमान एजेंसी को आगे का कार्य दिया जाएगा। वर्ष 2024-25 में दूसरे चरण के तहत गाजीपुर और भलस्वा (30-30 लाख मीट्रिक टन) कचरे का निस्तारण का कार्य शुरू हुआ था तो वहीं ओखला लैंडफिल पर 20 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण 18 माह में होना था।
सितंबर 2025 से शुरू हुई थी टेंडर प्रक्रिया
इस बीच एमसीडी को तीसरे चरण का कार्य शेष कूडे का निस्तारण का शुरू करना था, लेकिन सितंबर 2025 से एमसीडी ने तीसरे चरण के टेंडर की प्रक्रिया शुरू की थी जो कि अभी तक पूरी नहीं हुई है। जिसके बाद निगम ने यह निर्णय लिया है कि दूसरे चरण का कार्य कर रही एजेंसी से ही यह कार्य कराया जाएगा।
निगम के अनुसार नई एजेंसी के चयन में समय लगेगा और काम को तेजी से करने के लिए नई एजेंसी को काम देने के साथ नई मशीनें लगाने और पुरानी हटाने में समय लगेगा। इसी के चलते एमसीडी दूसरे चरण में काम करने वाली एजेंसी से आगे का कार्य कराएगी।
इसके आलावा एमसीडी ने जरुरत पड़ने पर तीसरे चरण का कार्य शुरू करने के लिए केंद्र सरकार के ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026 का पालन होगा। इसके लिए एमसीडी ने लैंडफिल पर शेष बचे हुए कचरे के निस्तारण के लिए आमंत्रित किए जाने वाले रिक्वेट फार प्रोपोजल (आरएफपी) की शर्तों में बदलाव को मंजूरी दी है।
नए ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026 अधिसूचित
एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने नए ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। एक अप्रैल 2026 से पूरे देश में इन्हें लागू किया जाना है। पूर्व के नियमों के तहत केवल दो तरह गीला व सूखा कचरा अलग-अलग करके उसके निस्तारण पर जोर दिया गया था। जबकि नए नियमों में चार तरह से कचरे को अलग-अलग करके उसका निस्तारण करना है।
वहीं, लैंडफिल को खत्म करने के लिए नियम बनाया गया है कि केवल लैंडफिल पर वहीं कचरा जाएगा जिसे रिसाइकिल या फिर वेस्ट टू एनर्जी के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि चूंकि नये नियमों का पालन एमसीडी को भी करना होगा इसलिए हमने इन लैंडफिल साइट के कूड़े के निस्तारण पर नई शर्ते जोड़ी हैं।
पार्षदों ने उठाया आवारा पशुओं और कुत्तों का मुद्दा
स्थायी समिति की बैठक में पार्षद निगम द्वारा बेसहारा जानवरों और आवारा कुत्तों को लेकर की जाने वाली कार्रवाई से संतुष्ठ नहीं दिखे। पार्षदों ने बेसहारा जानवरों के कारण होने वाली परेशानी का मुद्दा उठाया तो वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी आवारा कुत्तों के फीडिंग प्वाइंट बनाए जाने के बाद भी नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई न होने का मुद्दा उठाया।
भाजपा पार्षद जगमोहन महलावत, राजपाल सिंह और स्थायी समिति के उपाध्यक्ष सुंदर सिंह ने बेसहारा गाय के कारण होने वाली परेशानी का मुद्दा उठाया। वहीं, भाजपा की पार्षद शिखा भारद्वाज ने कहा कि आवारा कुत्तों को लेकर एमसीडी ने फीडिंग प्वाइंट बनाए हैं लेकिन कहां पर इसकी कोई जानकारी नहीं है। रोज नए-नए मामले लोगों को कुत्तों द्वारा शिकार होने के आ रहे हैं।
पार्को के सुधार के लिए आरडब्ल्यूए को राशि देने को मंजूरी
एमसीडी ने पार्कों को गोद लेने वाली आरडब्ल्यूए को दी जाने वाली सहायता राशि देने की संशोधित नीति को मंजूरी दे दी है। एमसीडी के अनुसार दिल्ली के निगम पार्कों के रखरखाव के लिए सभी आरडब्ल्यूए को माली को एक समान 13,500 रुपये प्रदान की जाएगी। इसकी निगरानी निगम प्रशासन करेगा। उल्लेखनीय है कि पूर्वकालिक दक्षिणी और उत्तरी के साथ पूर्वी निगम में अलग-अलग दरें थी जिन्हें एमसीडी ने एकीकृत रूप से मंजूर कर दिया है। वहीं, सामुदायिक केंद्रों का उपयोग कौशल विकास केंद्रों के तौर पर किया जाएगा।  |
|