भारत और फ्रांस के दोहरे कराधान नियमों में बदलाव। (पीटीआई)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। टैक्स में दोहराव से बचने और टैक्स प्रक्रिया को और स्पष्ट बनाने के लिए भारत और फ्रांस ने डबल टैक्सेशन अवायडेंस कंवेंशन (डीटीएसी) में संशोधन के लिए प्रोटोकाल पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत की तरफ से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन रवि अग्रवाल तो फ्रांस की तरफ से वहां के राजदूत थिर्रे मथयू ने ये हस्ताक्षर किए। दोनों देश टैक्स नियमों को जरूरत के मुताबिक अपडेट करना चाहते है।
वर्ष 1992 में दोनों देशों के बीच डीटीएसी पर हस्ताक्षर किए गए थे। डीटीएसी इसलिए किए जाते हैं ताकि एक ही आय पर दोनों देशों में अलग-अलग तरीके से टैक्स नहीं लगे। इससे निवेशकों को निवेश करने में आसानी होती है।
कैपिटल गेन से संबंधित टैक्स नियम में बदलाव
संशोधन के तहत मुख्य रूप से कैपिटल गेन से संबंधित टैक्स नियम को बदला गया है। अब किसी कंपनी के शेयर को बेचने पर कैपिटल गेन लगाने का अधिकार उस देश को होगा जहां कंपनी स्थित है। पहले इसे लेकर स्पष्टता नहीं थी। इससे विदेशी निवेशकों को निवेश करने में आसानी होगी और टैक्स का प्रारूप स्पष्ट रहेगा।
मोस्ट फेवर्ड नेशन क्लॉज अपडेट
संशोधन के तहत दोनों देशों के बीच मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) क्लॉज को अपडेट किया गया है। अब लाभांश पर 10 प्रतिशत की एकल दर तय की गई है। अगर किसी निवेशक के पास 10 प्रतिशत का शेयरहोल्डिंग है तो उन पर पांच प्रतिशत की रियायती दर लागू हो सकती है।
संशोधन के तहत अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से सूचना के आदान-प्रदान से जुड़े प्रविधानों को अपडेट किया गया है। इसका फायदा यह होगा कि दोनों देशों के बीच टैक्स से जुड़ी जानकारी बेहतर तरीके से मिल सकेगी और टैक्स चोरी रोकने में मदद मिलेगी। इस संशोधन से मुख्य फायदा बड़े निवेशक व कंपनियों को मिलेगा, लेकिन भविष्य में इससे निवेश का माहौल तैयार होगा।
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