9 लोकसेवकों पर FIR। (AI Generated Image)
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार पुलिस ने मादक पदार्थ की बरामदगी से जुड़े मामले में धोखाधड़ी करने तथा झूठा साक्ष्य गढ़ने के आरोप में बड़ी कार्रवाई की है।
आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पूर्वी चंपारण के सुगौली के तत्कालीन जीआरपी एवं आरपीएफ थानेदार, सुगौली के सीओ समेत नौ लोकसेवकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है। यह प्राथमिकी पुलिस मुख्यालय के आदेश पर गठित त्रिस्तरीय जांच समिति और एडीजी रेलवे की रिपोर्ट पर की गई है।
प्राथमिकी में तत्कालीन सुगौली जीआरपी थानाध्यक्ष सोती कुमार, आरपीएफ ओपी प्रभारी राजीव रतन प्रसाद सिंह, आरपीएफ सिपाही गोविंद कुमार महतो, अनुसंधान पदाधिकारी इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार, जीआरपी सिपाही समीर आलम, जीआरपी सिपाही मो जाकिर, आरपीएफ एएसआई प्रभु हाजरा आरपीएफ प्रधान आरक्षी रितेश प्रसाद वर्मा और दंडाधिकारी सह अंचलाधिकारी कुंदन कुमार शामिल हैं।
यह मामला मार्च 2025 का है। सुगौली रेल थाने में इससे संबंधित कांड 04/25 दर्ज है। इस कांड में पुलिस ने पैकेट में भारी मात्रा में मादक पदार्थ चरस की बरामदगी की थी, लेकिन दो महीने बाद न्यायालय में प्रदर्शित करने के दौरान यह पैकेट खुलने पर इसमें ईंटें बरामद हुई।
इसके बाद इसकी विस्तृत जांच कराई गई। मोतिहारी एडीएम शैलेंद्र कुमार भारती, समस्तीपुर के आरपीएफ कमांडेंट शेख जन अहमद जानी और मुजफ्फरपुर रेल एसपी बीणा कुमारी की तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने रिपोर्ट दी।
रचा गया आपराधिक षड्यंत्र
इसमें कहा गया है कि सभी नौ अभियुक्तों ने मिलीभगत कर आपराधिक षड्यंत्र रचा। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में जब्ती सूची बनाये जाने की प्रक्रिया को ही संदिग्ध बताया है।
सभी पदाधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद सुगौली जीआरपी थानाध्यक्ष ने जब्ती सूची पर हस्ताक्षर भी नहीं किया है।
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