रामलाल चौधरी की बेनामी संपत्ति की ईडी ने की जांच।
रवि अटवाल, चंडीगढ़। रेहड़ी लगाते-लगाते, झुग्गी में रहते-रहते फाइनेंसर और प्रॉपर्टी डीलर से करोड़पति बने तीसरी पास रामलाल चौधरी के खिलाफ ईडी की कार्रवाई जारी है। उसके खिलाफ चंडीगढ़ में प्रिवेंशन ऑफ मनी लाॅन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है।
ईडी को जांच के दौरान रामलाल से करोड़ों की संपत्ति और नकदी का पता चला। ईडी को जांच के दौरान रामलाल और उसके परिवार के नाम शहर के अलग-अलग इलाकों में 10 मकान मिले हैं। इनमें पांच मकान तो अकेले रामदरबार काॅलोनी में ही हैं।
उसके पास फ्लैट, कोठी, चार बूथ और ट्राईसिटी समेत पंजाब में 28 कनाल से ज्यादा खेतीबाड़ी की जमीन भी मिली है। ईडी के मुताबिक यह केवल नामी संपत्ति है जबकि उसके पास करोड़ों की बेनामी संपत्ति भी है, जिसकी जांच की जा रही है। ईडी को रामलाल के पास 10 बैंक खाते मिले हैं जिनमें 4.21 करोड़ रुपये की रकम जमा थी।
चार साल पहले चंडीगढ़ पुलिस ने 11 करोड़ रुपये की ठगी के दो बड़े मामले दर्ज किए थे। इन मामलों में शहर का नामी फाइनेंसर रामलाल चाैधरी गिरफ्तार हुआ था। चौधरी ने गुड़गांव के कारोबारी अतुल्य शर्मा से पांच करोड़ और हरियाणा के रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट रेवेन्यू ऑफिसर नरेश कुमार से छह करोड़ रुपये की ठगी की थी।
पकड़े जाने के बाद चौधरी के खिलाफ ईडी ने मनी लाॅन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। करीब चार साल चली जांच के बाद ईडी ने अब रामलाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।
सब्जी बेची, राशन की दुकान चलाई
ईडी को दिए बयान में रामलाल ने कहा कि वह केवल तीसरी कक्षा तक पढ़ा है। 16 साल की उम्र में वह राजस्थान के सीकर से चंडीगढ़ आया। यहां उसने 1976 से 1980 तक सब्जियां बेचने का काम किया। चंडीगढ़ के गांव करसान में एक छोटी राशन की दुकान चलाई।
वर्ष 1991 में उसे सरकारी राशन डिपो आवंटित हुआ, जहां वह केरोसिन तेल, चीनी, चावल और गेहूं आदि का वितरण करता था। इसके बाद उसने फाइनेंस और प्राॅपर्टी का काम शुरू कर दिया। वह झुग्गी से कोठियों और मकानों का मालिक बन गया। उस पर हत्या और दुष्कर्म के दो केस भी दर्ज हुए थे, जिनमें वह बरी हो गया था।
प्राॅपर्टी डीलिंग केवल दिखावा
रामलाल ने ईडी को दिए बयान में माना कि वह प्राॅपर्टी डीलिंग और फाइनेंस का काम करता था। उसने बताया कि ‘चौधरी प्रॉपर्टीज’ नाम से राम दरबार में कारोबार चलाता था, लेकिन ऐसी कोई फर्म पंजीकृत नहीं थी। उसके बेटे अमित कुमार ने भी बिना लाइसेंस फाइनेंस और अन्य कारोबार करने की बात कबूल की।
दरअसल, यह कारोबार केवल दिखावा था। वह शहर में अवैध रूप से फाइनेंस का कारोबार करता था। उसकी पुलिस में काफी अच्छी पकड़ थी। वह लोगों को उधार राशि देता था और बदले में मोटा ब्याज वसूलता था।
जो ब्याज नहीं दे पाता था, उसका प्रापर्टी कब्जा लेता था। सूत्रों का कहना है कि रामलाल की पहुंच तो पुलिसकर्मियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग तक भी थी, जिसके बदले में वह मोटी कमाई करता था। इसी तरह उसने कुछ ही सालों में करोड़ों की संपत्तियां बना ली।
ईडी को मिली यह प्राॅपर्टी
मकान, कोठी और फ्लैट
- सेक्टर-63 में टू-बीएचके फ्लैट
- सेक्टर-47डी में मकान
- सेक्टर-46ए में कोठी
- सेक्टर-45ए में एमआइजी फ्लैट
- आइवरी विलाज, जीरकपुर में फ्लैट
- रामदरबार में मकान नंबर 1248
- रामदरबार में मकान नंबर 880
- रामदरबार में मकान नंबर 1124रामदरबार में मकान नंबर 1356रामदरबार में मकान नंबर 1234
बूथ
- रामदरबार फेज-2 में बूथ नंबर-64
- रामदरबार फेज-2 में बूथ नंबर-91
- रामदरबार फेज-2 में बूथ नंबर-165
- रामदरबार फेज-2 में बूथ नंबर-89
खेतीबाड़ी वाली जमीन
- खुड्डा अलीशेर में सात कनाल, 18 मरले जमीन
- खरड़ में 2420 गज जमीन(करीब चार कनाल), जिसमें से 255 व 665 गज की रजिस्ट्री करवाई गई
- तहसील बलाचौर, जिला नवांशहर, पंजाब में 17 कनाल, 15 मरले जमीन
सात करोड़ की कोठी और जमीन कुर्क
ईडी ने रामलाल की सेक्टर-46 स्थित कोठी को कुर्क कर दिया था। 500 गज की इस कोठी की कीमत करीब सात करोड़ है। इसके अलावा उसकी खेतीबाड़ी की जमीन और कई बैंक खातों को भी कुर्क किया गया। ईडी ने जमीन और बैंक खाते मिलाकर कुल 11 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की।  |