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यह अल्लाह की मर्जी नहीं थीं... भ्रष्ट सिस्टम की आग में जल गए महिला और पांच बच्चे

Chikheang 4 hour(s) ago views 932
  

किदवई नगर में घर में आग लगने की सूचना पर पहुंची दमकल विभाग की टीम



सुशील कुमार, मेरठ। रुखसार ने एक घंटे तक बच्चों को बचाने के लिए जद्दोजहद की, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाई। बेबस मां के सामने पांचों बच्चों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। अस्पताल में लाइन में रखे छह शवों को देखकर हर किसी की आंख नम थी। लोग चिल्ला रहे थे... यह अल्लाह की मर्जी नहीं थी। भ्रष्ट सिस्टम की आग में बच्चे जल गए। दो किलोवाट का कनेक्शन लेकर पांच किलोवाट से अधिक बिजली का उपयोग किया जा रहा था। ऐसे में शार्ट सर्किट होना लाजिमी था।

मुहल्ले के लोगों का कहना था कि बिजली विभाग के कर्मचारी ही यह काम करवा रहे हैं। इसके लिए वसूली की जाती है। गली के सभी मकानों में इस तरह से ही बिजली आपूर्ति कराई जा रही है। उससे भी अहम बात है कि घर के अंदर कारखाना चल रहा था, लेकिन जिम्मेदार पूरी तरह से बेखबर थे। किदवई नगर में घर-घर के अंदर कपड़े के कारखाने चल रहे हैं, घरेलू दो किलोवाट बिजली के कनेक्शन पर बड़ी-बड़ी मशीने संचालित की जा रही हैं।
इकबाल के परिवार के सदस्य और रिश्तेदार कह रहे थे कि इन मौतों का जिम्मेदार प्रशासनिक अमला है। यदि बिजली विभाग, कारखाना विभाग और मेरठ विकास प्राधिकरण अपनी जिम्मेदारी सही से निभाते तो छह जानें न जाती।

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शवों को देखकर आक्रोशित हो गए थे लोग

राजधानी अस्पताल में इकबाल के बेटे अरशद की हिस्सेदारी है। सोमवार रात उसी अस्पताल में अरशद के भाई आसिम और फारुख के पांच बच्चों के साथ आसिम की पत्नी रुखसार का शव भी पड़ा था। पुलिस मान रही है कि सभी की मौत दम घुटने से हुई है। बच्चों की मौत को लेकर आक्रोशित मुस्लिम समाज के लोगों का कहना था कि गनीमत रही कि तत्काल ही बिजली के तार काट दिए थे, वरना पहली मंजिल पर मौजूद परिवार के सदस्यों को भी नहीं बचाया जा सकता था। लोगों की भीड़ कुछ समय के लिए आक्रोशित हो गई थी। हालांकि पुलिस बल लगाकर उन्हें शांत कर दिया गया।

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इकबाल अंसारी के जिस गोदाम में शार्ट सर्किट हुआ है,वह 50 गज की जमीन में बना है। उसके ग्राउंड फ्लोर पर कपड़ा भरा हुआ था। शार्ट सर्किट से सबसे पहले रेशम के कपड़ों में ही आग लगी। कुछ ही देर में आग की लपटें जाल से पहली मंजित को पार करते हुए दूसरी मंजित तक भी पहुंच गई। गली इतनी संकरी थी कि यहां पर दमकल की गाड़ियां पहुंचना भी मुमकिन नहीं था। पहले तो काल करने के बाद भी दमकल की गाड़ियां एक घंटा देरी से पहुंची। फिर गाड़ी इकबाल के मकान तक नहीं पहुंची।
उसके बाद पाइप डालकर पानी घटना स्थल पर पहुंचाने का प्रयास किया। पाइप छोटा पड़ गया। तब लोगों ने हंगामा कर दिया। उनका कहना था कि गाडी समय से आ जाती तो शायद दूसरी मंजिल में फंसे बच्चों और महिला को सुरक्षित निकाला जा सकता था।
लिसाड़ी गेट एरिया में पूरी तरह कराएंगे जांच-पड़ताल

एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि इकबाल अंसारी के घर हादसे के बाद लिसाड़ी गेट एरिया के सभी मुहल्लों की जांच कराई जाएगी, ताकि दोबारा से इस तरह का हादसा न हो। यदि किलोवाट के आधार पर बिजली के तारों का उपयोग किया जाता तो शायद हादसा नहीं होता। बिजली विभाग और कारखाना विभाग को इसकी रिपोर्ट भेजी जाएगी। यह रिपोर्ट तैयार करने के लिए फोरेंसिक टीम को लगाया गया है।   
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