धुबरी, असम में मखाना की बुवाई करवाते राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक। जागरण
विनय कुमार, दरभंगा । मिथिला का मखाना अब राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान प्राप्त कर चुका है। राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के नेतृत्व में बीते कुछ वर्षों में मखाना खेती का दायरा बिहार से निकलकर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बंगाल, असम एवं झारखंड तक फैल चुका है।
19 से 21 फरवरी तक उत्तर प्रदेश के कृषि विशेषज्ञों के दल ने दरभंगा आकर मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
पिछले दो वर्षों में केंद्र की ओर से लगभग 10 राज्यों के ढाई हजार से अधिक किसानों एवं उद्यमियों को यहां मखाना खेती और प्रसंस्करण का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
परिणामस्वरूप इन राज्यों में भी हाल के समय में मखाने का क्षेत्र विस्तार हुआ है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, बिहार के बाहर यह क्षेत्र लगभग चार से पांच हजार हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। इससे लगभग दो हजार किसान जुड़े हुए हैं।
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा को 2023 से राष्ट्रीय महत्व का दर्जा मिलने से अनुसंधान, तकनीकी विकास और प्रसार को नई गति मिली है। विशेष रूप से मखाना के क्षेत्र में यांत्रिकीकरण बड़ा परिवर्तन है।
मखाना प्रसंस्करण के यांत्रिकीकरण से न केवल श्रम साध्य कार्य आसान हुए हैं, बल्कि इससे मखाना फोड़ने की लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि एवं उत्पादन व प्रसंस्करण में बहुक्षेत्रीय भागीदारी संभव हुई है।
मखाना को मिला एचएसएन कोड
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के प्रयत्नों से मखाना को एचएसएन कोड मिलने से निर्यात को भी बढ़ावा मिला है। प्रधान विज्ञानी सह केंद्र प्रभारी डा. आइएस सिंह कहते हैं मध्य प्रदेश, असम, बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की जलवायु और जल संसाधन मखाना के लिए अनुकूल साबित हो रहे हैं। दरभंगा के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में इन राज्यों में मखाना की खेती का विस्तार हो रहा है।
स्वर्ण वैदेही मखाना के विस्तार में निभाई अहम भूमिका
वरिष्ठ विज्ञानी डा. मनोज कुमार ने कहा कि केंद्र द्वारा विकसित उन्नत प्रभेद ‘स्वर्ण वैदेही’ ने मखाना के क्षेत्र विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसकी उत्पादकता लगभग 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दरभंगा एवं आसपास के क्षेत्रों में किसान मखाना की खेती से प्रति हेक्टेयर तीन से चार लाख रुपये तक की आमदनी कर रहे हैं।  |
|