सांकेतिक तस्वीर
संवाद सहयोगी, गढ़वा। जिला व्यवहार न्यायालय गढ़वा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय शिवनाथ त्रिपाठी के न्यायालय ने मंगलवार को आपराधिक षड्यंत्र के तहत डायन-भूत का आरोप लगाकर भाई की हत्या करने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है।
रमकंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत बिराजपुर गांव निवासी लक्ष्मण सिंह, दशरथ सिंह, बैजनाथ सिंह एवं जगन्नाथ सिंह को भादवि की धारा 302 एवं 201 के तहत दोषी पाते हुए आजीवन सश्रम कारावास एवं 15 हजार रुपये आर्थिक जुर्माना की सजा सुनाई गई है। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक उमेश दीक्षित एवं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता राजेश विश्वास ने पैरवी की।
न्यायालय ने भादवि की धारा 302 के तहत आजीवन सश्रम कारावास एवं 10,000 रुपये आर्थिक जुर्माना, जुर्माना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास तथा धारा 201 के तहत पांच वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5,000 रुपये आर्थिक जुर्माना की सजा सुनाई।
बता दें कि 22 नवंबर 2019 को मृतक बरत सिंह की पत्नी सरिता देवी के बयान के आधार पर रमकंडा थाना कांड संख्या 85/2019 दर्ज कराया गया था। सूचिका ने आरोप लगाया था कि 20 नवंबर 2019 को सुबह करीब 11 बजे उसके पति भैंस चराने जंगल की ओर गए थे, जबकि वह मोबाइल बनवाने के लिए रमकंडा बाजार गई थी।
वापस लौटने पर पति के लापता होने की जानकारी मिली। खोजबीन के दौरान 21 नवंबर 2019 को कंदराही नाला के पास गमछा मिला और नाला से शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान बरत सिंह के रूप में उनकी पत्नी ने की। शव के दोनों कान कटे हुए थे तथा गर्दन पर धारदार हथियार से वार के निशान पाए गए थे।
सूचिका ने पुलिस को बताया था कि करीब दस दिन पहले उसके भसूर एवं देवर द्वारा भगत(झाड़-फूंक करने वाला) को बुलाकर घर बंधवाने का दबाव बनाया जा रहा था और पति-पत्नी पर डायन होने का आरोप लगाया गया था। पति द्वारा झाड़-फूंक का विरोध किए जाने पर आरोपितों ने षड्यंत्र रचकर हत्या कर दी।
पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत भेजा था तथा अनुसंधान पूर्ण कर आरोप पत्र समर्पित किया। न्यायालय ने 12 साक्षियों के बयान, उपलब्ध दस्तावेज एवं साक्ष्य के आधार पर चारों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।  |