आशुतोष ब्रह्मचारी और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की फाइल फोटो। इंटरनेट मीडिया
जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व उनके शिष्य पर यौन शोषण की प्राथमिकी दर्ज होने को शहर निवासी रमाशंकर दीक्षित ने साजिश का हिस्सा बताया है। उन्होंने कहा कि सात दिन पूर्व आशुतोष पांडेय ने अपने लोग भेजकर उनसे संपर्क साधा था। फोन पर बात करके कहा था कि अविमुक्तेश्वरानंद पर अपनी नाबालिग बेटी के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा दो, इसके बदले में रुपये मिलेंगे। इन्कार किया तो दूसरा रास्ता होने की बात कहकर फोन काट दिया।
उन्होंने अपनी पत्नी व बच्चों के साथ वाराणासी जाकर अविमुक्तेश्वरानंद व मीडिया के सामने पूरी जानकारी दे दी है। मूल रूप से हरदोई के रहने वाले रमाशंकर ने फोन पर बातचीत के दौरान संवाददाता को बताया कि उनके पिता दंडी स्वामी थे। वह ब्राह्मण संगठन के कार्य के सिलसिले में आशुतोष पांडेय से परिचित थे।
18 फरवरी को रिंग रोड पर टहलने गए तो उनके पास तीन युवक पहुंचे और उनके पिता का परिचय देकर बातचीत शुरू की। कुछ देर बाद उन युवकों ने एक काम करने के बदले बड़ी धनराशि देने की पेशकश की। उनको लगा युवकों के कोई परिचित संकट में जिनके लिए मदद मांग रहे हैं। जब तक कुछ पूछ पाते उनमें से एक युवक ने आशुतोष को काल लगा दी।
रमाशंकर का आरोप है कि आशुतोष पांडेय ने उनसे कहा कि काशी या बदरीनाथ जाकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर अपनी बेटी के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाएं। इसके बदले में इतना रुपया मिलेगा, जिससे वह कोई भी काम कर सकता है। आगे जो कुछ भी होगा वह संभाल लेंगे। रमाशंकर ने इन्कार किया।
कहा कि न तो वह कभी स्वामी से मिले हैं और न ही उनके किसी आश्रम में गए हैं, ऐसे में वह निराधार आरोप कैसे लगा सकते हैं। इन्कार करने पर फोन पर धमकी भी दी गई। कुछ दिन बाद हरदोई में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी मिलने पर उन्हें आशंका हुई कि कहीं उनके परिवार का नाम गलत तरीके से प्रयोग न किया गया हो।
इसी के चलते वह पूरे मामले की सफाई देने के लिए वाराणसी पहुंचे और मीडिया के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आशुतोष या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से कोई संबंध नहीं है और उन्हें किसी भी प्रकरण में न घसीटा जाए। फिलहाल वह परिवार के साथ वाराणसी में हैं।
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