ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर दिशानिर्देश मामले में सुप्रीम कोर्ट केंद्र और उप्र से मांगा जवाब (फोटो- एएनआई)
आईएएनएस, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय सोसायटियों में वर्ष 2024 के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने के संदर्भ में जारी दिशानिर्देशों को लागू कराने के लिए दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को नोटिस जारी कर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जायमाल्या बागची की पीठ सुनवाई की शुरुआत में उस समय नाराज हो गई, जब याचिकाकर्ता रचित कत्याल के वकील ने कहा कि इस मुद्दे पर याचिकाएं लंबित हैं और उनकी याचिका को भी उनके साथ सुनवाई के लिए स्वीकार किया जाना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, हमें इस सूची में एक और याचिका क्यों जोड़ना चाहिए?
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, जनहित याचिका दायर करने वालों की संख्या में तेज वृद्धि हो रही है। लगता है कि अब कुछ प्रमुख चेहरे ऐसे हैं जिनका एकमात्र एजेंडा सुबह अखबार पढ़ना और जनहित याचिका दायर करना है।
हालांकि पीठ ने बाद में कत्याल की याचिका स्वीकार कर ली और केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, ग्रेटर नोएडा स्थित निराला एस्टेट हाउसिंग सोसायटी और उसकी संपत्ति प्रबंधन एजेंसी कुशमैन एंड वेकफील्ड प्रापर्टी मैनेजमेंट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से जवाब मांगा है। याचिका पर 13 अप्रैल की सुनवाई हो सकती है।
याचिकाकर्ता ग्रेटर नोएडा (पश्चिम) निराला एस्टेट फेज-3 में फ्लैट में रहते हैं। उन्होंने ईवी खरीदा था। उन्होंने अपने खर्च पर प्रमाणित निजी ईवी चार्जर स्थापित करने के लिए 26 मई, 2025 को हाउसिंग सोसायटी और प्रबंधन एजेंसी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मांगा था।
हालांकि सरकारी दिशानिर्देशों के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया गया, जबकि विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापना और संचालन दिशानिर्देश 2024 में स्पष्ट रूप से निवासियों को निजी चार्जिंग यूनिट स्थापित करने की अनुमति दी गई है।
याचिका में कहा गया कि आवास समितियों द्वारा ईवी चार्जर लगाने के लिए एनओसी प्रदान करने से मनमाने ढंग से इन्कार करना अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। ईवी को अपनाने में मुख्य बाधा आवास समितियों द्वारा आवंटित पार्किंग स्थानों में इलेक्टि्रक वाहन चार्जर लगाने की अनुमति देने में अनुचित इन्कार या देरी है।  |
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