search

ट्राइसिटी के अस्पतालों में ESHS घोटाला: इलाज के नाम पर ₹100 करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा, सीबीआई ने की छापेमारी

Chikheang 1 hour(s) ago views 169
  

ईएसएचएस में इलाज के नाम पर 100 करोड़ से अधिक का घोटाला



बरिंद्र सिंह रावत, चंडीगढ़। केंद्र सरकार ने पूर्व सैनिकों के इलाज के लिए एक्स सर्विसमेन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) शुरू की थी। ट्राइसिटी में इस स्कीम में ही 100 करोड़ से अधिक का घोटाला हो गया है।

दरअसल, फर्जी तरीके से मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटलों में एडमिट दिखाकर इस स्कीम के तहत मोटे क्लेम लिए गए। न केवल मरीज की एडमिशन फर्जी हुई, बल्कि दवाइयों के बिल और टेस्ट रिपोर्ट भी फर्जी बनाई गई। इस घोटाले में ट्राइसिटी के कई प्राइवेट हॉस्पिटल शामिल है। मंगलवार को सीबीआई ने ट्राइसिटी के विभिन्न प्राइवेट हॉस्पिटलों और सेक्टर 38 में एक धार्मिक स्थल में चल रहे मेडिकल सेंटर में रेड की।

ईसीएचएस में फर्जीवाड़े का यह खेल सुनियोजित तरीके से खेल जा रहा है। सेक्टर 38 तथा सेक्टर 15 का एक प्राइवेट हॉस्पिटल इस खेल का केंद्र है। दिल्ली सीबीआई और चंडीगढ़ सीबीआई ऑफिस की टीमों ने सेक्टर 15 में धर्म हॉस्पिटल का रिकॉर्ड खंगाला। देर रात तक सीबीआई की टीम इस हॉस्पिटल में जांच करती रही।

इस खेल में प्राइवेट हॉस्पिटल से लेकर, डॉक्टर और प्राइवेट लैब तक शामिल है। यही नहीं शहर की एक प्राइवेट एजेंसी भी इस खेल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह एजेंसी हॉस्पिटलों को ईसीएचएस के तहत रजिस्टर्ड मरीज लाकर देती है। चंडीगढ़ के साथ साथ मोहाली और पंचकूला के हॉस्पिटल की इसमें प्रमुख भूमिका है। मरीज को डॉक्टरों की मिलीभगत से महंगी से महंगी दवा लिखी जाती है। यह दवा खरीदी नहीं जाती सिर्फ फर्जी बिल बनता है।

मरीज को गंभीर दिखाने के लिए लैब रिपोर्ट भी फर्जी तैयार की जाती है। मरीज के हॉस्पिटल में एडमिट हुए बिना हफ्ते दो हफ्ते का एडमिशन का बिल बना दिया जाता है। कई मामलों में तो बिना ऑपरेशन के ही मरीज को ऑपरेट हुआ बताकर बिल वसूल लिया गया।


ईएसएचएस में इलाज के नाम पर 100 करोड़ से अधिक का घोटाला
प्राइवेट हॉस्पिटलों के साथ मिलकर हुआ फर्जीवाड़ा
फर्जी मरीज, फर्जी बिल, फर्जी टेस्ट रिपोर्ट तैयार हुई
सीबीआई की ट्राइसिटी हॉस्पिटलों में रेड
सेक्टर 38 के एक सेंटर में हो रहा था फर्जी रिकॉर्ड तैयार pic.twitter.com/SapxXPv4GH — Shivaji Mishra (@ShivajiMis40490) February 24, 2026

सभी में बांटा जाता है हिस्सा

बिल की पेमेंट होने के बाद डॉक्टर, हॉस्पिटल, लैब और एजेंसी के बीच हिस्से का बंटवारा होता है।
ऐसे होता है खेल

दैनिक जागरण द्वारा की गई पड़ताल में सामने आया कि पहले मरीज ढूंढा जाता है। फिर बिना किसी जरूरत के मरीज को एडमिट दिखाया जाता है। उसके मेडिकल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की जाती है। फर्जी टेस्ट रिपोर्ट जोड़ी जाती हैं। फर्जी बिल बनाए जाते है। यही नहीं मरीजों की फाइल में फर्जी डॉक्यूमेंट भी लगाए जाते है। इनके आधार पर मरीज को एडमिट दिखाया जाता है। बिना एडमिट हुए सभी खर्चों के बिल बनते है।
एक दर्जन डॉक्टर शामिल

इस खेल में प्राइवेट हॉस्पिटलों के एक दर्जन डॉक्टर शामिल है। मरीजों को अधिकतर चंडीगढ़ और मोहाली के हॉस्पिटल में एडमिट दिखाया जाता है। मरीजों की सिर्फ ओपीडी में बुलाया जाता हैं। वहीं उन्हें हॉस्टल में एडमिट दिखा दिया जाता है।
5 से 10 लाख तक के बिल

हॉस्पिटलों ने ईसीएचएस स्कीम के तहत फर्जीवाड़े से 5 से 10 लाख रुपए तक के फर्जी बिल तैयार किए है। इनमें फर्जी टेस्ट रिपोर्ट और महंगी दवाइयों का बिल जोड़ दिया जाता है। दर्जनों बिल 2 से 5 लाख रुपए के है।   
like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
167413