सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। गभाना तहसील में सीलिंग की भूमि स्थानांतरण में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। कस्बे व रामपुर गांव के बीच स्थित एक आबादी वाली भूमि को सरकारी खाते में सीलिंग के रूप में दर्ज कर दिया गया है। तहसील प्रशासन ने यह फर्जीवाड़ा कस्बे की एक अन्य रिक्त भूमि को बचाने के लिए किया।
जिस जमीन को सीलिंग में दर्ज किया गया है, उस पर करीब 400 से अधिक दुकान-मकान बने हुए हैं। ऐसे में अब इस भवन स्वामियों के भविष्य पर संकट आ गया है। मामला खुलने पर अब मंगलवार को बड़ी संख्या में पीड़ित भवन स्वामी तहसील पहुंचे। यहां पर इन्होंने एसडीएम को घेराव किया। अब मामले में संबंधित क्षेत्र के लेखपाल त्रिलोकी प्रसाद को निलंबित कर दिया गया है। राजस्व निरीक्षक राकेश भारती के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
मामला का पर्दाफाश होने पर लेखपाल निलंबित
पीड़ितों के अनुसार गभाना के गाटा संख्या 57 की लगभग 28 बीघा समेत अन्य भूमि पूर्व में सीलिंग में दर्ज थी। इस संबंध में 1982 में राज घराने से जुड़े लोकेंद्र राज सिंह ने न्यायालय में अपील दायर की थी। इसमें इन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी भूमि को बिना सहमति के ही सीलिंग में दर्ज कर लिया गया है। लोकेेंद्र राज सिंह की मृत्यु के बाद इस मामले की पैरवी उनके वारिस शशांक प्रताप सिंह कर रहे हैं।
गभाना तहसील के रामपुर गांव मामला
अब पिछले दिनों न्यायालय ने मामले में पीड़ित द्वारा दिए गए विकल्प के आधार पर अतिरिक्त रिक्त भूमि को सीलिंग में शामिल करने के निर्देश दिए थे। इस पर विकल्प के तौर पर रामपुर गांव की गाटा संख्या 17 व 24 की भूमि प्रस्तुत की गई। तहसील स्तर से कराए गए भौतिक सत्यापन के बाद न्यायालय ने करीब 52 बीघा भूमि से शशांक प्रताप सिंह का नाम हटाकर उसे उत्तर प्रदेश सरकार (सीलिंग) के नाम दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया, लेकिन इसमें हैरान करने वाली बात यह है कि जिस जमीन को कागजों में खाली दिखाया गया, वहां घनी आबादी बसी हुई है।
पीड़ित मकान मालिकों ने तहसील पर किया प्रदर्शन
400 से अधिक दुकान-मकान बने हुए हैं। तमाम परिवार रहते हैं। पिछले दिनों जब तहसीलदार उक्त दर्ज सीलिंग की जमीन की सत्यापन को पहुंचे तो ग्रामीणों को मामले की जानकारी हुई। मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण पूर्व विधायक दलवीर सिंह के पौत्र अजय सिंह के साथ तहसील पहुंचे।
यहां पर एसडीएम कार्यालय का घेराव कर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि आबादी वाली भूमि को सीलिंग में दर्ज करना सरासर अन्याय है। इसके साथ ही गलत रिपोर्ट तैयार करने वाले राजस्व कर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई।
लेखपाल का निलंबन
एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से लेखपाल को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही अन्य के खिलाफ भी कार्रवाई तय की जा रही है, लेकिन इतने बड़े फर्जीवाड़े के पर्दाफाश होने पर पूरा सिस्टम ही कठघरे में खड़ा हो गया है। लोगों के आरोप हैं कि जिम्मेदारों ने मिलीभगत से यह पूरा फर्जीवाड़ा किया है।
मामला संज्ञान में आया है। संबंधित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) को प्रकरण की फाइल पुन: खोलने के निर्देश दिए गए हैं। इससे वास्तविक स्थिति की जांच कर न्यायसंगत निर्णय लिया जा सके। किसी भी निर्दोष परिवार को बेघर नहीं होने दिया जाएगा। -
हरीश चंद, एसडीएम गभाना।  |
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