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वाराणसी में क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर 50 लाख की ठगी, तीन साइबर ठग गिरफ्तार

LHC0088 3 hour(s) ago views 734
  

मामले का खुलासा करते पुलिस अधिकारी। जागरण  



जागरण संवाददाता, वाराणसी। पुलिस कमिश्नरेट की प्रतिबिंब सेल टीम ने क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने और नया कार्ड जारी करने के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का राजफाश करते हुए बलिया के अनीश वर्मा, झारखंड के देवघर निवासी पुरुषोतम कुमार व टुनटुन कुमार पंडित को गिरफ्तार किया है।

इनके पास से कुल 10 मोबाइल फोन, 09 सिम कार्ड, 200 एपीके फाइल के अलावा आइसीआइसीआइ एडमिन, वर्चुअल कार्ड, आभा पे सरीके नौ संदिग्ध ऐप बरामद हुए हैं। पकड़े गए गिरोह ने लगभग 50 लाख रुपये ऐंठने की बात कुबूली है। डीसीपी क्राइम आकाश पटेल, एडीसीपी नीतू व एसीपी विदुष सक्सेना ने प्रतिबिंब पोर्टल टीम की पीठ थपथपाई है।

पुलिस उपायुक्त ने बताया कि साइबर सेल की प्रतिबिंब पोर्टल टीम दारोगा हिमांशु त्रिपाठी, आरक्षी अंकित गुप्ता शिकायतों के आधार पर संदिग्ध नंबरों की एनालिसिस साइबर ठगों का क्लू मिला। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि तीनों आरोपित थाना सारनाथ क्षेत्र के अकथा स्थित एक मकान में किराए पर रहकर साइबर ठगी की घटना करते थे।

पुलिस टीम ने इन्हें दबोचा तो गिरोह के सरगना के रूप में जौनपुर निवासी जय प्रकाश यादव और आरिफ अंसारी फर्जी का नाम सामने आया, जो फर्जी सिम और कूटरचित मोबाइल एप उपलब्ध कराते थे। गिरफ्तार पुरुषोतम व टुनटुन के खिलाफ लखनऊ व झारखंड में मुकदमे दर्ज हैं।

फेसबुक पर चलाते थे फर्जी विज्ञापन
आरोपितों ने बताया कि फेसबुक आइडी बनाकर उस पर क्रेडिट कार्ड बनवाने व लिमिट बढ़ाने का विज्ञापन चलाते थे। इच्छुक लोगों से आवेदन के बहाने नाम, मोबाइल नंबर, पैन और अन्य विवरण जुटाए जाते थे। इसके बाद उन्हें आइसीआइसीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड एप जैसा दिखने वाला फर्जी एपीके लिंक भेजा जाता था।

एप इंस्टाल होते ही पीड़ितों के मोबाइल पर आने वाले ओटीपी और अन्य बैंकिंग सूचनाएं आरोपितों के ‘आइसीआइसीआई एडमिन’ नामक एप पर दिखाई देने लगती थीं। जिस पर मिले ओटीपी के जरिए आनलाइन शॉपिंग साइट, वालेट और अन्य माध्यमों से रकम निकाल लेते थे। पुलिस टीम में साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक मनोज तिवारी, आरक्षी आदर्श आनंद सिंह, जावेद अख्तर, सारनाथ थाना के दारोगा बुधराज शामिल रहे।

कई राज्यों के लोगों से कर चुके हैं ठगी
प्रतिबिंब पोर्टल से मिले साक्ष्यों में पता चला कि विभिन्न राज्यों की शिकायतें और एफआइआर पहले से लिंक हैं। आरोपितों के व्हाट्सएप चैट में ठगी की रकम के लेनदेन और निर्देशों के प्रमाण भी मिले हैं। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित कर उनकी हैश वैल्यू जनरेट की है।

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इस तरह करते थे वारदात

  • फेसबुक पर क्रेडिट कार्ड बनाने/लिमिट बढ़ाने का विज्ञापन।
  • इच्छुक व्यक्तियों के पैन कार्ड, बैंक विवरण प्राप्त करना।
  • आइसीआइसीआइ क्रेडिट कार्ड जैसा दिखने वाला हूबहू कूटरचित एपीके फाइल इंस्टाल कराना।
  • वीडियोकाल कर क्रेडिट कार्ड का डीटेल प्राप्त करना।
  • फर्जी सिम कार्ड एवं बार-बार बदले गए मोबाइल उपकरणों का प्रयोग।


पुलिस की जनता से अपील

  • एपीके फाइल को इंस्टाल न करें।
  • ओटीपी, कार्ड विवरण किसी से साझा न करें।
  • साइबर अपराध की सूचना तत्काल 1930 हेल्पलाइन व www.cybercrime.gov.in पर दें।
  
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