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152 लोगों की मौत और 179 घायल... जम्मू-कश्मीर में बारिश ने मचाया भीषण कहर, चौंका देंगे आंकड़े

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कैप्शन: जम्मू-कश्मीर में बारिश ने मचाई थी भीषण तबाही (जागरण फाइल)



राज्य ब्यूरो, जम्मू। पिछले साल जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश से व्यापक तबाही हुई थी। इसमें 152 लोगों की जान चली गई और 179 लोग घायल हो गए। मृतकों में 151 जम्मू संभाग और एक कश्मीर घाटी से था। इनमें लगभग 100 तीर्थयात्री शामिल थे, जिनकी अगस्त 2025 में किश्तवाड़ जिले में मचेल माता यात्रा और रियासी जिले में वैष्णो देवी तीर्थ मार्ग पर बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं में मौसम हो गई थी।

इसके अलावा भारी बारिश से 21 हजार ढांचे जिनमें अधिकतर रिहायशी मकान थे, क्षतिग्रस्त हुए। जबकि 1,515 मवेशियों की मौत हुई थी आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण विभाग द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार 14 अगस्त 2025 को किश्तवाड़ के चिशौती गांव में बादल फटने की विनाशकारी घटना में 63 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए थे। जबकि 30 लोग लापता हो गए। इसके बाद 26 अगस्त को मूसलाधार बारिश के कारण वैष्णो देवी मार्ग पर हुए भूस्खलन में 32 लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए।

सरकार ने बताया कि मृतकों, घायलों और मकानों को हुए नुकसान के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत निर्धारित मानकों के अनुसार मुआवजा वितरित किया गया है। विभाग के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान एसडीआरएफ के तहत 289.39 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिनमें से 200.39 करोड़ रुपये जम्मू संभाग और 89 करोड़ रुपये कश्मीर संभाग को राहत एवं पुनर्स्थापन कार्यों के लिए दिए गए।
3304 मकान हुए पूरी तरह नष्ट

जम्मू संभाग में सबसे अधिक नुकसान हुआ, जहां 3,304 मकान पूरी तरह नष्ट हुए, 1,818 गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए और 11,622 आंशिक रूप से प्रभावित हुए। इसके अलावा 3,531 झोपड़ियां और पशु शेड नष्ट हुए, 1,461 मवेशियों की मौत हुई और 1,035 टिन शेड नष्ट हुए। कश्मीर संभाग में 12 मकान पूरी तरह, 44 गंभीर रूप से और 597 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। साथ ही 71 झोपड़ियों और पशु शेडों को नुकसान पहुंचा तथा 54 मवेशियों की मौत हुई।

विभाग के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तीन से सात सितंबर 2025 के बीच जम्मू-कश्मीर में हुए नुकसान का आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालय केंद्रीय टीम भेजी थी, जिसने केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न प्रभावित जिलों का दौरा किया।

नुकसान के बारे में छह नवंबर 2025 को गृह मंत्रालय को जानकारी सौंप दी गई। केंद्र शासित प्रदेश सरकार के अनुरोध पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी विशेषज्ञों की एक टीम को 17 से 25 नवंबर 2025 के बीच पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट के लिए भेजा। इसकी रिपोर्ट भी गृह मंत्रालय को सौंप दी गई है।

अंतर-मंत्रालय केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत जम्मू-कश्मीर को 1,431 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। सरकार ने कहा कि विभागों से बाढ़ पुनर्स्थापन कार्यों के विस्तृत प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद यह राशि संबंधित विभागों को जारी की जाएगी।
भूस्खलन प्रभावित घरों को आर्थिक मदद

प्रस्तावों की जांच, समेकन और प्रस्तुति के लिए 3 फरवरी को एक समिति गठित की गई है। एसडीआरएफ के तहत जारी 289.39 करोड़ रुपये के अतिरिक्त, कैपेक्स बजट 2025-26 के अंतर्गत फ्लड रिलीफ मेजर्स गतिविधि के तहत 100 करोड़ रुपये (प्रत्येक जिले के लिए 5 करोड़ रुपये निर्धारित) जारी किए गए हैं ताकि आपदा के तात्कालिक प्रभाव से निपटा जा सके। मुख्यमंत्री राहत कोष में किश्तवाड़ में चिशौती बाढ़ पीड़ितों को 207 लाख रुपये से अधिक, पुंछ जिले के सुरोथी और कालाबन गांवों में भूस्खलन प्रभावित घरों के लिए 45 लाख रुपये दिए।

  

    
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