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दुबई में मिलेगा उत्तरकाशी की ट्राउट मछली का स्वाद, एक्सपोर्ट की तैयारी

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ट्राउट मछली के उत्पादन में दूसरे स्थान पर है उत्तरकाशी।



अजय कुमार, उत्तरकाशी। मत्स्य विभाग की कवायद को पंख लगे तो सात समुंदर पार दुबई के लोग भी उत्तरकाशी की ट्राउट मछली का स्वाद ले सकेंगे। पहले चरण में विभाग की योजना 20 क्विंटल मछली दुबई भेजने की है। हालांकि, पहले पिथौरागढ़ जनपद से मछली का निर्यात होगा, इसके बाद ही उत्तरकाशी जनपद का नंबर आएगा। इसके लिए जरुरी प्रक्रिया पूरी करने में छह माह का समय लग सकता है।

सीमांत उत्तरकाशी जनपद ट्राउट मछली के उत्पादन में चमोली के बाद दूसरे स्थान पर है। यहां वर्तमान में प्रति वर्ष 800 क्विंटल से ज्यादा ट्राउट मछली का उत्पादन हो रहा है। समझौते के तहत यहां मातली व महिडांडा में तैनात आइटीबीपी की क्रमश: 12वीं व 35वीं वाहिनी को प्रति सप्ताह 540 किलो ट्राउट मछली की आपूर्ति की जाती है। बाकी मछली विभाग के देहरादून स्थित उत्तरा फिश आउटलेट, मत्स्य सहेली व कियोस्क को भेजी जाती है।

विभाग ने अब मछली का उत्पादन बढ़ाने के साथ उसे विदेश तक पहुंचाने की भी योजना बनाई है। पहले चरण में निर्यात के लिए पिथौरागढ़ जनपद को चुना गया है। पहली खेप में वहां से 20 क्विंटल ट्राउट मछली दुबई भेजी जाएगी। इसके बाद उत्तरकाशी जनपद का नंबर आएगा। इससे मछली उत्पादकों को तो सीधा लाभ मिलेगा ही, यहां उत्पादित ट्राउट मछली को भी वैश्विक पहचान मिलेगी।
उत्पादन बढ़ाने को कलस्टर निर्माण पर जोर

उत्तरकाशी में ट्राउट मछली का उत्पादन बढ़ाने के लिए विभाग ने कलस्टर निर्माण पर जोर देना शुरु कर दिया है। यहां मछली का उत्पादन करने वाली 25 समितियां पंजीकृत हैं, जिनमें से 12 सक्रिय हैं। विभाग के अनुसार एक क्षेत्र में दस तालाबों का एक कलस्टर बनाया जा रहा है। गंगा व यमुना घाटी में उक्त समितियां एक तरह से कलस्टर के अनुरुप ही कार्य कर रही हैं।
ट्राउट मछली की विशेषता

ट्राउट मछली पालन पर्यावरण के अनुकूल है, इस मछली का पालन साफ और ठंडे पानी में होता है, इसलिए इसे प्रदूषण रहित क्षेत्रों में ही पाला जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग हो पाता है। यह मछली उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होती है। जो कि दिल की सेहत के लिए बेहतरीन भोजन मानी जाती है।

साथ ही इसमें मौजूद विटामिन, सेलेनियम और पोटेशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली और मांसपेशियों के लिए भी फायदेमंद होते हैं। यही कारण है कि बाजार में इसकी प्रति किलो कीमत 800 रुपए तक है।

उत्तरकाशी जनपद से ट्राउट मछली निर्यात दुबई के लिए करने की येाजना है। जब पिथौरागढ़ जनपद सफलतापूर्वक ट्राउट मछली का निर्यात कर देगा, तब उत्तरकाशी का नंबर आएगा। - नीतीश कुमार, सहायक निदेशक मत्स्य विभाग उत्तरकाशी।

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