ग्वायर हॉल हॉस्टल के बाहर छात्रों, मेस कर्मचारियों और निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में विरोध-प्रदर्शनों पर रोक के बावजूद सोमवार और मंगलवार रात ग्वायर हाल हॉस्टल के बाहर छात्रों, मेस कर्मचारियों और निवासियों का जमावड़ा लगा रहा। आर्यमान के सुरक्षाकर्मी और उनके साथियों के हास्टल में ठहरने को लेकर शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे प्रशासनिक आदेशों की प्रभावशीलता पर सवाल बन गया।
प्रतिबंध के बावजूद 100 से अधिक छात्र हॉस्टल के बाहर बैठकर नारेबाजी करते दिखे, जिससे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और नियम लागू कराने की क्षमता पर प्रश्नचिह्न लग गया।
छात्रों ने नारे लगाए“डूसू पदाधिकारी हास्टल छोड़ो”, “छात्र एकता जिंदाबाद” और “डूसू प्रशासन मुर्दाबाद”। प्रदर्शन के दौरान छात्रों में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ पदाधिकारियों को लेकर नाराजगी साफ दिखी। उनका आरोप था कि गैर-छात्रों की आवाजाही से हास्टल का माहौल प्रभावित हो रहा है और इसी वजह से उन्हें विरोध के लिए मजबूर होना पड़ा।
मामले पर प्रतिक्रिया के लिए डीन आफ कॉलेजेज बलराम पाणी, रजिस्ट्रार विकास गुप्ता और प्रॉक्टर मनोज कुमार सिंह से फोन और व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क किया गया उनकी ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले जारी नोटिस में दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय के पुराने दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए पांच प्रमुख पाबंदियां घोषित की थीं। इनमें पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक, परिसर में नारेबाजी या माइक से भाषण देने पर प्रतिबंध, किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन या जुलूस की मनाही, आग से संबंधित वस्तुओं के उपयोग पर रोक तथा सड़कों पर आवाजाही बाधित करने वाली गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई शामिल है।
हालांकि जमीनी स्थिति इन आदेशों से अलग नजर आई। लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने यह संकेत दिया है कि प्रशासनिक सख्ती कागजों तक सीमित रह गई है। छात्रों ने कहा कि डूसू पदाधिकारियों की वजह से प्रदर्शन करने पर हम मजबूर हुए है। जो लोग स्टूडेंट भी नहीं है वह भी हास्टल में आते है इससे माहौल प्रभावित होता है। इसीलिए हमारी मांग है कि डूसू के पदाधिकारियों को इस हॉस्टल को खाली कराने के निर्देश दिए जाए।
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