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झारखंड राय यूनिवर्सिटी दीक्षा समारोह: राज्यपाल बोले- दीक्षा शैक्षिक यात्रा का अंत नहीं, नई जीवन यात्रा का शुभारंभ

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झारखंड राय यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा व अन्य लोग। जागरण



जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड राय यूनिवर्सिटी रांची के छठे दीक्षा समारोह में राज्यपाल सह विश्वविद्याकाय के विजिटर संतोष कुमार गंगवार ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते कहा यह उपलब्धि विद्यार्थियों के कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा दीक्षा समारोह केवल शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं बल्कि एक नई जीवन-यात्रा का शुभारंभ है।

शिक्षा का उद्देश्य मात्र डिग्री प्राप्त करना नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों का विकास और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग राष्ट्र एवं समाज के कल्याण में करें। राज्यपाल ने कहा आज हमारा देश नए आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास का मंत्र देश को नई दिशा दे रहा है। विकसित भारत @2047 के संकल्प को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे नवाचार-आधारित अभियानों ने युवाओं को रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजक बनने की प्रेरणा दी है। कहा कि वर्तमान समय में विश्व तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्र नए अवसर प्रदान कर रहे हैं।

नई दिल्ली में आयोजित वैश्विक एआइ सम्मेलन का उल्लेख करते कहा भारत तकनीकी नेतृत्व की दिशा में सशक्त रूप से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में आपकी बेहतर एवं अनुकूल क्षमता, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और रचनात्मक सोच आपकी सबसे बड़ी शक्ति होगी। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठा पद से नहीं, बल्कि कर्म और चरित्र से प्राप्त होती है।

कहा कि राज्य की उच्च शिक्षा को बेहतर एवं गुणात्मक बनाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि राज्य की यूनिवर्सिटी की गणना राष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्ट यूनिवर्सिटी में हों, निजी यूनिवर्सिटी की भूमिका भी इसमें महत्वपूर्ण है। उन्होंने गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार और नैतिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया और कहा कि किसी भी यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा उसके विद्यार्थियों की उपलब्धियों और समाज में उनके योगदान से निर्मित होती है। समारोह में यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर डा. पीयूष रंजन ने यूनिवर्सिटी रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा यूनिवर्सिटी स्थापना काल से चार मार्गदर्शक स्तंभों पर कार्य कर रही है।

यूनिवर्सिटी में 21 कार्यक्रम, 8 फैकल्टी और 6 विभाग संचालित हैं। पिछले अकादमिक वर्ष में विद्यार्थियों के नामांकन में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी इस बात को दर्शाती है कि गुणवत्ता, ज्ञान, कौशल, नवोन्मेष और ज्ञान परंपरा को लेकर हमारा ध्येय सही दिशा में है। कुलपति ने झारखंड राय यूनिवर्सिटी कक्षा आधारित शिक्षा के साथ व्यावहारिक और स्व-ज्ञान प्राप्त शिक्षा पर जोर देती है।

कहा कि पिछले कुछ वर्षों ने अकादमिक और शोध क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं जिनमें आइआइटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ एमओयू, शिक्षकों का 30 से अधिक पेटेंट और विद्यार्थियों के स्टार्टअप को मिली स्वीकृति भी शामिल है। समारोह का संचालन कुलसचिव डा. अमृता मजूमदार ने किया। समारोह में कुल 494 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। जिसमें 380 छात्र एवं 114 छात्राएं थीं।

इस दौरान राज्यपाल ने 14 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल जबकि 2 को चांसलर मेडल प्रदान किया। गोल्ड मेडल प्राप्त करने वालों में 6 छात्र एवं 8 छात्राएं हैं। समारोह में स्नातकोत्तर विषय के 107 विद्यार्थी, स्नातक के 315, डिप्लोमा पाठ्यक्रम के 61 एवं पीएचडी उपाधि प्राप्त करने वाले 11 शोध छात्र-छात्राएं भी शामिल रहे।
यूनिवर्सिटी तकनीकी संस्थानों के साथ शिक्षा को आगे बढ़ा रही

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने दीक्षा समारोह को संबोधित करते कहा झारखंड राय यूनिवर्सिटी कई शोध, तकनीकी संस्थानों के साथ शिक्षा को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा यूनिवर्सिटी में जहां आप शोध और ज्ञान के माध्यम से कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं वहीं कई बातें है जिनका उल्लेख किया जाना आवश्यक है।

कहा कि भारत ने दुनिया के साथ मंच साझा करते हुए एआइ के माध्यम से एक भौतिक धरातल जो खोज, शोध और ज्ञान को असीम विस्तार देते हुए उसकी संभावनाओं पर कार्य करने का अवसर देता है। प्रधानमंत्री चाहते है कि देश और अधिक विकास और शोध क्षेत्र में आगे बढ़े। हमें इन क्षेत्रों में अभी और ठोस कार्य की आवश्यकता है। भारत कई क्षेत्रों में उत्पादक की भूमिका में है लेकिन हमें अपने इंडीजिनस तकनीक को याद रखना आवश्यक है।
राष्ट्र और यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी पूंजी आप हैं

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलाधिपति डा. हरबिन अरोड़ा राय ने कहा दीक्षा हमारी ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है इस परंपरा के साथ आप सभी विद्यार्थियों को भी जुड़ने का अवसर मिला है। यह समारोह उस परंपरा को भी दर्शा रहा है जिसके गवाह आप सभी बने हैं। कहा कि राष्ट्र और यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी पूंजी आप हैं।

ऐसा नहीं है कि यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी होने के बाद आप इससे अलग हो गए हैं अब आप एलुमनाई के तौर पर अपनी सेवाएं देंगे। वहीं, सेशेल्स गणराज्य की भारत उच्चायुक्त ललतियाना एकौचे ने भारत और सेशेल्स के आपसी संबंधों की चर्चा करते कहा कि दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है जिनमें शिक्षा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा महिला शक्ति का उत्थान महत्वपूर्ण है वह अपने देश की पहली महिला उच्चायुक्त है जो दर्शाता है कि आधी आबादी के लिए शिक्षा कितना महत्वपूर्ण है।   
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