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हरकी पैड़ी की तंग गलियों में गैस सिलेंडरों का ‘बारूद घर’, लगातार हो रहे अग्निकांड

LHC0088 2 hour(s) ago views 515
  

हरकी पैड़ी की तंग गलियों में गैस सिलेंडरों का ‘बारूद घर’



जागरण संवाददाता, हरिद्वार। धर्मनगरी के सबसे महत्वपूर्ण हरकी पैड़ी क्षेत्र की तंग गलियों में संचालित होटल और रेस्टोरेंटों में रसोई गैस सिलिंडरों का उपयोग खतरे का कारण बन रहा है। घनी आबादी, संकरी गलियां और दिनभर उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच सुरक्षा इंतजामों के बिना गैस सिलिंडरों का जमकर भंडारण किया जा रहा है। जबकि आए दिन दुकानों में आग लगने की घटनाएं सामने अा रही हैं। लेकिन कार्यवाही सिर्फ आग बुझाने तक सीमित रहती है।

कारोबारियों से लेकर पुलिस-प्रशासन तक, कोई भी खतरे की घंटी को भांप नहीं पा रहा है। शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है। दो दिन पहले विष्णुघाट पर तीन दुकानों में आग लगने के दौरान गैस सिलिंडर फटने से भयावह तस्वीर सामने आई। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। इसके बावजूद, इस समस्या से निपटने के लिए कोई पहल नहीं हुई।

कई प्रतिष्ठानों में एक से अधिक सिलिंडर एक साथ रखे जाते हैं। कुछ स्थानों पर तो बैकअप के नाम पर चार से पांच सिलेंडर तक रसोई के भीतर या संकरी सीढ़ियों के पास रख दिए जाते हैं। पास में ही चूल्हा जलाकर पकवान बनाए जाते हैं। पाइपलाइन और रेगुलेटर की नियमित जांच को लेकर भी कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती।

ऐसे में मामूली चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। हरकी पैड़ी क्षेत्र और आसपास की गलियों में आग लगने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। हालांकि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि जोखिम वास्तविक है। किसी दिन भीड़भाड़ के समय आग लग जाए तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।
गलियों में नहीं पहुंचते दमकल वाहन

हरकी पैड़ी क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या इसकी भौगोलिक संरचना है। गलियां इतनी संकरी हैं कि बड़े अग्निशमन वाहन भीतर तक नहीं पहुंच सकते। कई स्थानों पर तो दुपहिया वाहन तक मुश्किल से निकल पाते हैं। ऐसी स्थिति में दमकल कर्मियों को पाइप लाइन बिछाकर दूर से पानी पहुंचाना पड़ता है, जिससे राहत कार्य में देरी की आशंका बनी रहती है।

अग्नि सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई प्रतिष्ठानों में अग्निशमन यंत्र या तो नहीं हैं या फिर उनकी वैधता समाप्त हो चुकी है। फायर सेफ्टी ऑडिट, आपातकालीन निकास मार्ग और गैस भंडारण के मानकों का पालन कितनी गंभीरता से हो रहा है, इस पर प्रभावी निगरानी नजर नहीं आती।
रात-दिन श्रद्धालुओं की आवाजाही

हरकी पैड़ी के साथ ही आस-पास के सुभाष घाट, गऊ घाट, कुशावर्त घाट, विष्णुघाट, मोती बाजार आदि इलाकों में रात दिन श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। भीड़भाड़ वाले इस क्षेत्र में हर दिन हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन सुरक्षा मानकों को लेकर सख्ती और निरंतर निगरानी का अभाव है।

ऐसे में जरा सी लापरवाही सैकड़ों जिंदगियों को खतरे में डाल सकती है। जबकि जरूरत है कि नियमित जांच अभियान चलाते हुए गैस सिलेंडरों के सुरक्षित भंडारण कराए जाएं। स्पष्ट गाइडलाइन लागू करने और अग्निशमन व्यवस्था को सुदृढ़ करना भी जरूरी है। साथ ही संकरी गलियों में छोटे फायर टेंडर या विशेष आपातकालीन वाहन तैनात करने की आवश्यकता भी लंबे समय से जताई जा रही है।


अग्निकांड रोकने के लिए समय-समय पर अभियान चलाकर चेकिंग की जाती है। जहां तक तंग गलियों में अग्निशमन की बात है, इसके लिए हाइडेंट बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही इस दिशा में काम होने की उम्मीद है। वंश बहादुर राय, मुख्य अग्निशमन अधिकारी हरिद्वार


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