search

मथुरा, मुजफ्फरनगर, जालंधर... क्यों ज्यादा तप रहे देश के 100 से ज्यादा शहर? स्टडी में खुलासा

cy520520 3 hour(s) ago views 179
  

फरवरी में ही कई शहरों में तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इस साल फरवरी में ही देश के कई हिस्सों में पारा सामान्य से ऊपर चढ़ने लगा है। दिल्ली में 16 फरवरी को अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। प्रयागराज में 13 फरवरी को तापमान 30 डिग्री रहा, जबकि तेलंगाना के कई इलाकों में 34 से 37 डिग्री तक गर्मी पड़ गई।

  
रिसर्च में बड़ा दावा

प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित एक नई स्टडी ने चेतावनी दी है कि दुनियाभर में तापमान 2 डिग्री बढ़ने पर भी (पेरिस समझौते की सीमा) छोटे और मध्यम शहरों पर असर सामान्य से कहीं ज्यादा होगा। शहरों का अनियोजित विस्तार इसकी मुख्य वजह बन रहा है।
5 करोड़ लोग खतरे में

शोधकर्ताओं ने एशिया, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और अमेरिका के 104 शहरों (आबादी 3 से 10 लाख) का गहन अध्ययन किया, जहां कुल 5 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं। नतीजे चौंकाने वाले हैं। 2 डिग्री की वैश्विक बढ़ोतरी के साथ 81 प्रतिशत शहरों में दिन के समय तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों में तेजी से बढ़ेगा।

कुछ शहरों में यह बढ़ोतरी 3 डिग्री तक पहुंच सकती है। बिना शहरी हीट आइलैंड प्रभाव के केवल 3 शहरों में 3 डिग्री से ज्यादा वृद्धि दिखती है, लेकिन हीट आइलैंड को शामिल करने पर यह संख्या 26 हो जाती है।
भारत सबसे बड़ा हॉटस्पॉट

भारत इस समस्या का सबसे बड़ा केंद्र बन रहा है। यहां शहरी क्षेत्रों में का तापमान ग्रामीण इलाकों की तुलना में 45 प्रतिशत तक ज्यादा बढ़ सकता है। उत्तर भारत के जालंधर, बठिंडा, पटियाला, हिसार, रोहतक, मथुरा, बीजापुर, नांदेड़, अकोला, मुजफ्फरनगर, शाहजहांपुर, सतना और गया जैसे शहरों में यह वृद्धि अनुमान से दोगुनी तक हो सकती है।
देशभर में गर्मी का बढ़ता जोखिम

काउंसिल ऑन एनर्जी एनवायरनमेंट एंड वॉटर के मुताबिक देश की 76 प्रतिशत आबादी अत्यधिक गर्मी के बहुत उच्च जोखिम में है। 417 जिले अत्यधिक जोखिम वाली श्रेणी में और 201 जिले मध्यम जोखिम में आते हैं।
छोटे शहर क्यों हो रहे ज्यादा गर्म?

कंक्रीट, डामर और ऊंची इमारतों का घनत्व तेजी से बढ़ रहा है। ये सतहें दिनभर सूरज की गर्मी सोख लेती हैं और रात में धीरे-धीरे छोड़ती हैं, जिससे तापमान नहीं गिर पाता। पेड़ों का तेजी से घटना प्राकृतिक ठंडक खत्म कर रहा है। अनियोजित विस्तार और कमजोर शहरी नियोजन ने समस्या को और विकराल बना दिया है।
टियर-2 और टियर-3 शहर तैयार हैं?

इन शहरों में बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाएं पहले से सीमित हैं। हीटवेव के दौरान हालात और बिगड़ सकते हैं। ज्यादातर हीट एक्शन प्लान पुराने वैश्विक मॉडलों पर आधारित हैं जो शहरी हीट आइलैंड को सही ढंग से नहीं पकड़ पाते।

विशेषज्ञों का मानना है कि टेम्पररी समाधान काफी नहीं। शहर नियोजन, कूल रूफ, हरित क्षेत्र बढ़ाना, सामुदायिक कूलिंग सेंटर और शुरुआती चेतावनी तंत्र जैसे दीर्घकालिक कदम तुरंत जरूरी हैं।

सोर्स: प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज स्टडी

यह भी पढ़ें: यूपी में होली के बाद भीषण गर्मी की चेतावनी, मार्च के पहले सप्ताह में 35 डिग्री सेल्सियस पहुंच सकता है पारा   
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
163832