पश्चिम एशिया के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों में बीते एक दशक में बड़ा बदलाव आया है। इस संबंध पर मध्यूपूर्व में जियोपॉलिटिकल टेंशन का असर पड़ा है। इस इलाके में बार-बार होने वाले टकरावों का असर इस इलाके के देशों को होने वाली सप्लाई पर पड़ा है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों और अब ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद इस इलाके के देशों के साथ भारत के व्यापार पर बड़ा असर पड़ेगा।
विदेशी व्यापार पर लग सकती है चोट
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पश्चिमी देशों से भारत के व्यापार में कमी आ सकती है। साथ ही क्रूड सहित दूसरे कमोडिटीज की सप्लाई चेन पर इस लड़ाई का बड़ा असर पड़ेगा। एक दशक पहले पश्चिम एशिया के साथ भारत के व्यापार में ईरान और इजरायल की (दोनो को मिलाकर और जीसीसी को छोड़कर) करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी थी। 2024 तक यह घटकर 20 फीसदी पर आ गया। इसमें सैंक्शंस, जियोपॉलिटिकल रीएलाइनमेंट और बदलती ट्रेड प्रायरिटीज का हाथ रहा।
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ईरान के साथ घटा है व्यापार
सबसे ज्यादा गिरावट ईरान के साथ भारत के व्यापार में आई है। इसकी वजह ईरानी तेल के निर्यात पर अमेरिका का प्रतिबंध है। FY24 में भारत और ईरान का द्विपक्षीय व्यापार घटकर करीब 2.5 अरब डॉलर रह गया। एक दशक पहले यह 26.5 अरब डॉलर था। यह डेटा यह संकेत देता है कि ईरान पहले भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार था। लेकिन, पिछले कुछ सालों में इसमें बड़ी गिरावट आई है।
इजरायल से बढ़ा है डिफेंस का आयात
इजरायल के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते दूसरे तरह के रहे हैं। बीते एक दशक में इजरायल को भारत से निर्यात 21 फीसदी बढ़ा है, जबकि आयात में 15 फीसदी गिरावट आई है। इससे कुल ट्रेड करीब स्टेबल है। हालांकि, इंपोर्ट में डिफेंस और टेक्नोलॉजी सेक्टर्स की हिस्सेदारी बढ़ी है। इजरायल से भारत का हथियारों और गोला-बारूदों का आयात करीब 100 गुना बढ़ा है। FY13 में यह 10 लाख डॉलर था, जो FY24 में बढ़कर 10.4 करोड़ डॉलर पहुंच गया।
भारत इजरायल से खरीदता है आधुनिक हथियार
इजरायल से भारत का एयरक्राफ्ट, स्पेसक्राफ्ट और इससे जुड़े पार्ट्स का आयात तेजी से बढ़ा है। यह बीत एक दशक में 3.1 करोड़ डॉलर से बढ़कर 19.3 करोड़ डॉलर हो गया है। इससे पता चलता है कि दोनों देशों के बीच कुल ट्रेड वॉल्यूम स्थिर रहा है, लेकिन डिफेंस इक्विपमेंट्स के आयात में बड़ा उछाल आया है। एक्सपर्ट्स का कहना है मध्यपूर्व में तनाव बढ़ने से इजरायल से भारत के आयात पर भी पड़ेगा।
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माल ढुलाई की लागत आसमान में पहुंच सकती है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में अगर लड़ाई बढ़ी तो इसका सबसे ज्यादा असर दुनियाभर में जरूरी समानों की ढुलाई पर पड़ेगा। लाल सागर कॉरिडोर में बाधा आसने एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले रूट्स प्रभावित हो सकते हैं। इससे फ्रेट यानी माल ढुलाई की लागत काफी बढ़ जाएगी। इंश्योरेंस कॉस्ट भी बढ़ेगी। लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ने से पश्चिमी देशों को भारत के निर्यात पर असर पड़ेगा। इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा। |