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ED Cyber Fraud Case: 641 करोड़ के साइबर फ्रॉड में ED की बड़ी कार्रवाई, दो चार्टर्ड अकाउंटेंट गिरफ्तार

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ED Cyber Fraud Case: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को बताया कि लगभग 641 करोड़ रुपये की आपराधिक आय से जुड़े एक बड़े साइबर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो चार्टर्ड अकाउंटेंट - अशोक कुमार शर्मा और भास्कर यादव - को गिरफ्तार किया गया है।



28 फरवरी, 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत उनकी गिरफ्तारी की गई। कई बार अग्रिम जमानत की कोशिशें खारिज होने के बाद दोनों ने अदालत के सामने सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद ED ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।



धोखाधड़ी कैसे हुई




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ED की जांच के अनुसार, यह मामला एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़ा है, जिसने देशभर में कई आम लोगों को निशाना बनाया। आरोप है कि लोगों को फर्जी निवेश योजनाओं, पार्ट-टाइम नौकरी के ऑफर, QR कोड से जुड़े फ्रॉड, फिशिंग और अन्य ऑनलाइन लालच देकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए फंसाया जाता था।



धोखाधड़ी से प्राप्त पैसे को पहले कुछ टेलीग्राम ग्रुप के सदस्यों द्वारा संचालित म्यूल बैंक अकाउंट में जमा किया गया। फिर धन के स्रोत को छिपाने के लिए इसे पूरे भारत में फैली शेल और डमी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए अलग-अलग जगह घुमाया जाता था।



फिनटेक और क्रिप्टो के जरिए विदेश भेजा गया पैसा



जांचकर्ताओं ने पाया कि मनी लॉन्ड्रिंग की गई धनराशि को भारतीय बैंकों द्वारा जारी वीजा और मास्टरकार्ड डेबिट कार्ड का उपयोग करके UAE स्थित “PYYPL“ नामक फिनटेक प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर किया गया था।



इन वॉलेट से, पैसा या तो विदेशों में, विशेष रूप से दुबई में, ATM और प्वाइंट-ऑफ-सेल लेनदेन के माध्यम से निकाला गया या बाइनेंस एक्सचेंज के माध्यम से इसे वर्चुअल डिजिटल एसेट यानी क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया गया। इसके बाद रकम को कई अलग-अलग क्रिप्टो वॉलेट्स में ट्रांसफर कर दिया गया, ताकि पैसे का असली स्रोत छिपाया जा सके।



पेशेवर लोगों का संगठित गिरोह



ED के मुताबिक, यह मनी लॉन्ड्रिंग ऑपरेशन एक संगठित सिंडिकेट द्वारा चलाया जा रहा था, जिसमें पढ़े-लिखे पेशेवर लोग भी शामिल थे। इस गिरोह में चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत कई लोग शामिल थे, जिनमें Ashok Kumar Sharma, Bhaskar Yadav, Ajay Yadav और Vipin Yadav के नाम सामने आए हैं।



आरोप है कि इस ग्रुप ने दिल्ली के बिजवासन में एक ही पते से संचालित होने वाली 20 से अधिक कंपनियां बनाई और उन्हें नियंत्रित किया। इन कंपनियों के पार्टनर और अधिकृत साइन करने वाले कई जगह एक ही थे। इतना ही नहीं, इन कंपनियों में एक जैसे KYC दस्तावेज, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का इस्तेमाल किया जा रहा था।



जांचकर्ताओं ने बताया कि इन कंपनियों का इस्तेमाल अवैध धन को छिपाने और उसे भारत से बाहर भेजने के लिए किया जाता था।



तलाशी अभियान और फरार होना



ईडी अधिकारियों ने 28 नवंबर, 2024 को शर्मा और यादव के आवासों सहित कई स्थानों पर तलाशी ली। तलाशी के दौरान, अशोक कुमार शर्मा कथित तौर पर परिसर से फरार हो गया और कार्रवाई से बचने की कोशिश में ईडी अधिकारियों पर हमला किया, जिसके बाद उसके और उसके भाई सुभाष शर्मा के खिलाफ कपासहेरा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई।



भास्कर यादव को जब पता चला कि ईडी के अधिकारी तलाशी के लिए उनके घर पहुंचे हैं, तो वह कथित तौर पर फरार हो गए।



शर्मा के आवास पर छापेमारी के दौरान, अधिकारियों ने ATM कार्ड और फर्जी कंपनियों से जुड़े चेकबुक सहित कई फर्जी दस्तावेज जब्त किए।



जमानत याचिकाएं खारिज



नवंबर 2024 में तलाशी के बाद से, दोनों आरोपी फरार थे और गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की अर्जी दे रहे थे। हालांकि, स्पेशल PMLA कोर्ट ने 15 जनवरी, 2025 को उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी आरोपों की गंभीरता और PMLA की धारा 45 के प्रावधानों का हवाला देते हुए 2 फरवरी, 2026 को उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं।



इसके बाद, भास्कर यादव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन उसकी स्पेशल लीव पिटीशन 18 फरवरी, 2026 को खारिज कर दी गई और उन्हें संबंधित अदालत के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया गया।



आत्मसमर्पण के बाद, दोनों आरोपियों को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया।



मामले में अब तक की कार्रवाई



ईडी ने अब तक इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने दो अंतरिम कुर्की आदेश भी जारी किए हैं, जिनमें लगभग 8.67 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है।



इसके अलावा, PMLA स्पेशल कोर्ट में दो अभियोजन शिकायतें (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर की गई हैं, जिनका संज्ञान न्यायालय ने पहले ही ले लिया है। ईडी ने कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है।



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