FDI Norms: भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए चीन सहित उन सभी देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों में ढील दी है, जिनकी सीमाएं भारत से लगती हैं। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में \“प्रेस नोट 3 (2020)\“ के कड़े प्रावधानों में संशोधन को मंजूरी दी गई।
क्या था पुराना प्रेस नोट- 3 नियम?
साल 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत ने निवेश के नियम कड़े कर दिए थे। नियम के मुताबिक, भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले 7 देशों चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान से आने वाले किसी भी निवेश के लिए सरकार की मंजूरी लेना अनिवार्य था। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय कंपनियों के \“अवसरवादी अधिग्रहण\“ को रोकना था, विशेषकर चीन की ओर से।
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जून 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद भारत ने कई कड़े कदम उठाए थे। टिकटॉक, वीचैट और अलीबाबा जैसे 200 से अधिक चीनी ऐप्स को भारत सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया गया था। चीनी निवेश प्रस्तावों की जांच को बेहद सख्त कर दिया गया था, जिससे कई बड़े प्रोजेक्ट्स अटक गए थे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने यह कदम व्यापारिक संतुलन और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए उठाया है। हालांकि चीन से आने वाला निवेश कुल FDI का मात्र 0.32% ($2.51 बिलियन) है, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। चीन फिलहाल भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वित्त वर्ष 2025 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर $99.2 बिलियन पहुंच गया था। निवेश नियमों में ढील देने से चीनी कंपनियां भारत में प्लांट लगा सकेंगी, जिससे आयात कम करने में मदद मिल सकती है।
क्या होगा इस फैसले का असर?
FDI मानदंडों में ढील देने से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की सप्लाई चेन मजबूत होगी और पड़ोसी देशों की तकनीक व निवेश का लाभ भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकेगा।
निर्यात और आयात के ताजा आंकड़े
हाल के महीनों में चीन के साथ भारत के व्यापारिक रिश्तों में बदलाव देखा गया है:
निर्यात में उछाल: अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच, चीन को भारत का निर्यात 38.37% बढ़कर $15.88 बिलियन हो गया।
आयात की स्थिति: इसी अवधि में आयात भी 13.82% बढ़कर $108.18 बिलियन रहा, जिससे व्यापार घाटा फिलहाल $92.3 बिलियन पर है। |