Russian Il-76MD-90AE India: भारतीय वायुसेना के आगामी मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) टेंडर को लेकर हलचल तेज है. सूत्रों के मुताबिक रूस ने संकेत दिया है कि यदि वायुसेना कार्गो क्षमता की जरूरत बढ़ाती है. तो वह अपने उन्नत Il-76MD-90AE ट्रांसपोर्ट विमान को व्यापक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) पैकेज के साथ पेश करेगा.

भारतीय वायुसेना लंबे समय से रूसी मूल के ट्रांसपोर्ट विमानों का इस्तेमाल करती रही है. Il-76 और An-32 विमान दशकों से एयरलिफ्ट, आपदा राहत, मानवीय सहायता और ऊंचाई वाले इलाकों में रसद पहुंचाने जैसे कार्यों में इस्तेमाल होते रहे हैं. फिलहाल IAF के पास Boeing C-17 और Il-76 का बेड़ा है. जो भारी सामान और सैनिकों की लंबी दूरी तक ढुलाई में अहम भूमिका निभाता है.

ट्रांसपोर्ट विमान की खासियत क्या है?

Il-76MD-90AE, Il-76 परिवार का सबसे आधुनिक संस्करण है. इसमें नए PS-90A-76 इंजन, मजबूत ढांचा, आधुनिक एवियोनिक्स और बेहतर ईंधन दक्षता दी गई है. रूस का दावा है कि यह विमान कच्चे या अर्ध-तैयार रनवे से भी उड़ान भर सकता है. जो भारत के दूरदराज और पहाड़ी इलाकों के लिए महत्वपूर्ण है. इसकी कार्गो क्षमता इसे सैन्य और आपदा राहत दोनों मिशनों के लिए उपयोगी बनाती है.
फायद क्या होगा?
MTA कार्यक्रम में अब बदलाव की संभावना है. शुरुआत में वायुसेना ने 18 से 30 टन पेलोड क्षमता वाले विमान की जरूरत जताई थी. ताकि पुराने An-32 विमानों को बदला जा सके. लेकिन अब योजना है कि An-32 और पुराने Il-76 दोनों को एक ही नए विमान से बदला जाए. इससे बेड़े का प्रबंधन आसान होगा. ट्रेनिंग और रखरखाव का खर्च कम होगा. लॉजिस्टिक सिस्टम सरल बनेगा.
भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का ऑफर
यदि पेलोड क्षमता की सीमा बढ़ती है. तो Il-76MD-90AE जैसे भारी विमान की उपयोगिता बढ़ सकती है. ऐसे में रूस की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और भारत में स्थानीय निर्माण या असेंबली की पेशकश और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.
टेक्नोलॉजी से भारत को क्या फायदा होगा?

भारत के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एक जरूरी शर्त है. क्योंकि देश रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाना चाहता है. ToT के साथ आने वाला प्रस्ताव मेक इन इंडिया नीति के हिसाब से होगा. भारत के एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग आधार को मजबूत कर सकता है. IAF को Il-76 प्लेटफॉर्म का लंबा अनुभव होने से संचालन और रखरखाव में भी सुविधा मिल सकती है.


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