सोशल मीडिया पर तमाम इंफ्लूएंसर्स हरदीप पुरी के पक्ष में बैटिंग कर बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि- हरदीप पुरी जी जेफ्री एपस्टीन से मिले थे लेकिन लिंक्डइन के मालिक ने उन्हें किसी प्रोफेशनल काम के लिए उन्हें मिलवाया था। वहीं, दूसरी तरफ कुछ एक्स यूजर्स हरदीप पुरी के पक्ष में ट्वीट करने वालों के लिए बिक गए अथवा सबका मालिक एपस्टीन जैसे शब्द लिख रहे हैं। आप भी पढ़िए कौन-कौन क्या-क्या लिख बोल रहा है।



प्रशांत कनोजिया-

अगर जेफ्री एपस्टीन भारत में होता, तो शायद श्री सिन्हा उसका भी उसी तरह बचाव करते, जैसे उन्होंने अतीत में आसाराम और गुरमीत राम रहीम जैसे बलात्कार के दोषियों का किया है। सिन्हा का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि वह ऐसे लोगों के लिए हमेशा नैतिक वकील बनने को तैयार रहते हैं।
एपस्टीन से बस एक गलती हो गई—वह बीजेपी जॉइन नहीं कर पाया। अगर कर लेता, तो ‘वॉशिंग मशीन’ में धुलकर शायद संत घोषित कर दिया जाता। फिर मोदी भक्त उसे भी समाज सुधारक और राष्ट्रसेवक साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते।





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