गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क भारी बिकवाली के दबाव में आ गए। सेंसेक्स 558.72 अंक की गिरावट के साथ 83,674.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 146.65 अंक लुढ़क कर 25,807.20 पर आ गया। हाल की स्थिरता के बाद आई इस तेज गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक संकेतों का मिलाजुला असर और खास सेक्टरों की चिंताएं रहीं। रात भर आए अमेरिका के उम्मीद से ज्यादा मजबूत नौकरियों के आंकड़ों (US Jobs Data) ने फेडरल रिजर्व द्वारा जल्द ब्याज दरें घटाए जाने की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया, जिससे ग्लोबल स्तर पर 'रिस्क-ऑफ' सेंटिमेंट बढ़ गया।

इस गिरावट का सबसे बड़ा असर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर पर देखने को मिला। Nifty IT इंडेक्स करीब 5.5% लुढ़क गया, जो पिछले कई महीनों में इसकी सबसे बड़ी गिरावट थी और यह लगभग 10 महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। इस बड़ी बिकवाली की वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से पैदा होने वाली चिंताओं को लेकर बढ़ता डर था, जिसे विश्लेषकों ने "एन्थ्रोपिक शॉक" (Anthropic Shock) का नाम दिया है। AI ऑटोमेशन में तेजी से यह चिंता बढ़ गई है कि कोडिंग, मेंटेनेंस और सपोर्ट जैसे पारंपरिक IT सर्विसेज अब AI द्वारा बड़े पैमाने पर ऑटोमेटेड हो सकती हैं। इससे भारतीय IT कंपनियों के लिए प्राइसिंग प्रेशर और लेबर-इंटेंसिव मॉडल्स की मांग में कमी आने का खतरा मंडरा रहा है। Coforge, Infosys और Tech Mahindra जैसी प्रमुख IT कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि, बाकी सेक्टर्स में उतनी बड़ी गिरावट नहीं देखी गई। FMCG, मेटल्स और बैंकिंग जैसे सेक्टर्स ने तुलनात्मक रूप से अच्छा प्रदर्शन किया, जो निवेशकों के टेक्नोलॉजी शेयरों से दूर जाने का संकेत देता है। इन सबके बीच, भारत की मैक्रो-इकॉनमी की तस्वीर अभी भी मजबूत बनी हुई है। 2026 के लिए रियल GDP ग्रोथ का अनुमान काफी अच्छा है, जिसमें गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने 6.9% और मूडीज (Moody's) ने FY27 के लिए 6.4% का अनुमान लगाया है, जबकि RBI ने FY26 के लिए 7.4% का अनुमान बरकरार रखा है। RBI ने फरवरी की मीटिंग में अपनी पॉलिसी रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखी और न्यूट्रल स्टैंड बनाए रखा। भारत-अमेरिका (India-US) और भारत-यूरोपियन यूनियन (India-EU) के बीच हुए ट्रेड डील्स भी एक्सपोर्ट और बिजनेस सेंटिमेंट के लिए पॉजिटिव हैं।


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