केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को कहा कि सरकार की आर्थिक विकास नीति गरीबों, किसानों, उद्योगों और श्रमिकों के हितों में संतुलन बनाने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि भारत के दीर्घकालिक विकास के लिए उद्योग और श्रमिकों का साथ-साथ आगे बढ़ना बेहद जरूरी है।


‘सीआईआई एनुअल बिजनेस समिट 2026’ में आयोजित ‘नेक्स्ट-जनरेशन लेबर रिफॉर्म्स’ विषय पर विशेष सत्र को संबोधित करते हुए मांडविया ने कहा कि सरकार ऐसा विकास मॉडल तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो उद्योगों के अनुकूल होने के साथ-साथ श्रमिकों के हितों का भी ध्यान रखे। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार गरीबों और किसानों के हित में काम करने वाली सरकार है, लेकिन यह उद्योगों के अनुकूल भी है।”

मंत्री ने आगे कहा, “जरूरी है कि हम उद्योग समर्थक और श्रमिक समर्थक दोनों सोच के साथ आगे बढ़ें। उद्योग और श्रमिकों को एक-दूसरे से जुड़कर साझा भविष्य की ओर बढ़ना होगा।” केंद्रीय मंत्री मांडविया ने आगे कहा कि देश में टिकाऊ आर्थिक विकास तभी संभव है, जब उद्योगों की प्रगति और श्रमिकों का विकास साथ-साथ हो। सम्मेलन के दौरान भारत की कार्यशक्ति की बदलती भूमिका और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य पर भी चर्चा हुई।

एक अन्य सत्र में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि भारत के कामकाजी वर्ग की बढ़ती खरीद क्षमता घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के विकास में बड़ी भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा, “भारतीय कामकाजी वर्ग की बेहतर होती खरीद क्षमता घरेलू खपत को बढ़ाएगी, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी और भारत विकसित व आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।”

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