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न शोर, न धुआं, बस रोशनी और संगीत... दिल्लीवासी मना रहे ग्रीन दीवाली; धमाकों से उगेंगे सिर्फ पौधे

Chikheang 2025-10-20 04:35:56 views 808
  

दिल्लीवासी प्रदूषण रहित दीपावली की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में इस साल दीपावली का पर्व एक नए रंग और संकल्प के साथ मनाया जा रहा है। सदियों से चली आ रही पटाखों की परंपरा को दरकिनार करते हुए अब दिल्लीवासी एक प्रदूषण रहित दीपावली की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव सेहत के प्रति बढ़ती जागरूकता और पर्यावरण प्रेम को दर्शा रहा है।

जहां पहले पटाखों की गूंज और धुएं के बादल छाए रहते थे। वहीं, इस बार लोगों ने मिट्टी और एलइडी दीप के साथ प्रकृति को संवारने का अनूठा तरीका अपनाया है। बाजारों में इस समय सीड बाल्स (बीज गेंदें) की मांग जोरों पर है, जो पटाखों का एक रचनात्मक विकल्प बनकर उभर रहा है। लोग अब पारंपरिक आतिशबाजी को छोड़कर सीड बॉल्स पतंग और पानी में तैरने वाले फूलों के सीड बाल्स से सजी लालटेन का चुनाव कर रहे हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
धमाकों से नहीं, अब पौधों से होगा स्वागत

सीड बाल्स से भरी पतंग के गुब्बारे की खूबी यह है कि इसमें ऐसे बीज के दाने मौजूद हैं, जो हवा में फैलकर जमीन पर बिखरेंगे और पहली बारिश के साथ ही पौधे का रूप लेंगे। इस बार दीपावली का हर \“धमाका\“ प्रदूषण नहीं बल्कि हरियाली और जीवन का उपहार लेकर आएगा। दिल्ली में यह पहल पहली बार हो रही है, जो \“स्वस्थ दिल्ली- हरित दिल्ली\“ के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ी पहल हो सकती है।
बाजार में \“सीड बम\“, ई-कामर्स पर बहार

बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए कुछ कंपनियों ने सीड बम (बीज बम) भी पेश किए हैं। जिन पर कोई प्रतिबंध भी नहीं है। इन अनोखे \“पटाखों\“ में बीज वाले कैप्सूल मौजूद हैं। अमेजान, फ्लिपकार्ट और जियो मार्ट जैसी ई-कामर्स वेबसाइट्स पर इनकी खूब बिक्री हो रही है। इनकी कीमत 300 रुपए से शुरू होकर 3500 रुपए तक है। हालांकि, कुछ लोग अभी भी अन्य जगहों पर होने वाली आतिशबाजी को लेकर चिंतित भी हैं।
न शोर, न धुआं, बस रौशनी और संगीत

वहीं, जिन लोगों को ग्रीन पटाखे नहीं मिल पाए, उन्होंने भी शोर और धुएं को कम करने का एक वैकल्पिक रास्ता एलईडी लाइट्स और साउंड बाक्स को चुना है। बाजारों में ऐसे अत्याधुनिक साउंड बाक्स उपलब्ध हैं, जिनमें कई तरह के पटाखों के साउंड इफेक्ट्स वाले गाने आसानी से मिल जाते हैं। इन्हें चलाकर लोग पटाखों जैसा आनंद ले सकेंगे। इससे पर्यावरण को कोई नुकसान भी नहीं हो रहा है।
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