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पर्यटकों के लिए पहली पसंद बना लखनऊ, यूपी के ये 2 जिले तो रह गए सबसे पीछे

cy520520 2025-10-28 19:33:01 views 1235
  



जासं, लखनऊ। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की तर्ज पर लखनऊ सहित छह जिलों के राज्य राजधानी क्षेत्र में आने वाले सौ पयर्टकों में से अकेले लखनऊ में ही 46 पर्यटक आते हैं। लखनऊ के बाद सबसे अधिक बाराबंकी में 31 प्रतिशत पर्यटकों का आना रहता है। उन्नाव में 14 प्रतिशत, सीतापुर में सात प्रतिशत तथा हरदोई एवं रायबरेली में एक-एक प्रतिशत पर्यटक ही आते हैं। सुनियोजित विकास के साथ एससीआर में शामिल दूसरे जिलों की तरफ भी पर्यटक आकर्षित हो सकें इसके लिए कार्ययोजना तैयार हो रही है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

राज्य राजधानी क्षेत्र रीजनल प्लान की पहली सर्वे रिपोर्ट में प्रस्तावित एससीआर में प्रतिवर्ष लगभग 1.8़ करोड़ पर्यटकों के आने की बात कही गई है। स्वभाविक तौर पर पर्यटकों के लिए लखनऊ सबसे पहले है। एससीआर के विस्तार के साथ पर्यटन को भी कैसे बढ़ाया जाए इस पर दोनों कंसल्टेंट फर्म एईकॉम इंडिया प्रालि एवं एजीस इंडिया कन्सल्टिंग इंजीनियर्स प्रालि को काम करने को कहा गया है।

खासकर सीतापुर, हरदोई और रायबरेली में पर्यटन की संभावनाओं पर कंपनियां आगे अध्ययन करेंगी। कंसल्टेंट कंपनी द्वारा एक वर्ष में रीजनल प्लान तैयार किया जाएगा। जिसके बाद कंपनी अगले पांच वर्ष में रीजनल प्लान के मुताबिक परियोजनाओं को चिन्हित करते हुए उनका डीपीआर तैयार करेगी।

साथ ही स्थल पर परियोजनाओं को क्रियान्वित कराने का काम सुनिश्चित कराएगी। दरअसल राज्य सरकार का धार्मिक पर्यटन पर काफी जोर है सीतापुर में पहले से ही नैमिषारणय को विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है इसमें 84 कोसी परिक्रमा मार्ग और इसके अंतर्गत आने वाले 36 गांवों को शामिल किया गया है।

इसी तरह दूसरे जिलों में भी पर्यटन की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। पिछले दिनों तत्कालीन मंडलायुक्त डा रोशन जैकब ने कंसल्टेंट के साथ बैठक कर एससीआर के प्रत्येक जिले में पर्यटन को एक उद्योग के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए थे। जिलों की एतिहासिकता, धार्मिक महत्व के स्थलों के अलावा वहां की आर्थिकी व अन्य विशेषताओं को लेकर कार्ययोजना बनाने को कहा है।

एससीआर में क्या है प्रस्तावित

पांचों जिलों का करीब 26 हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र इसके दायरे में होगा। जनपदों के बीच हाई स्पीड रेल एवं रोड कनेक्टिविटी का प्रस्ताव है। जनपदों की जनसंख्या और बसावट के स्वरूप के आधार पर अवस्थापना एवं विकास परियोजनाओं का खाका खींचा जाएगा। आवागमन तेज और सुगम होने से औद्योगिक व व्यावसायिक विकास को बल मिलने की संभावना है। इससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होंगे और प्रदेश का आर्थिक विकास होगा। एससीआर का मुख्यालय लखनऊ में ही होगा जिससे एक ही जगह से सभी प्रशासनिक कार्यों किया जा सकेगा।
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