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गुरुग्राम: सहरावन गांव के पास टोल प्लाजा निर्माण में राष्ट्रीय सुरक्षा का पेंच, केंद्रीय मंत्री ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

cy520520 2025-11-1 02:37:07 views 1158
  

केंद्रीय योजना, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने जीएमडीए, एचएसआईआईडीसी, जिला प्रशासन से लेकर एनएचएआई के अधिकारियों के साथ शुक्रवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में बैठक की। जागरण



जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर सहरावन गांव के नजदीक बनाए जाने वाले टोल प्लाजा में राष्ट्रीय सुरक्षा का पेंच फंस गया। गांव के नजदीक राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित संवेदनशील क्षेत्र है। टोल प्लाजा व आस-पास लगाए जाने वाले कैमरों में संवेदनशील क्षेत्र की गतिविधियां कैद होने की आशंका व्यक्त की है। ऐसे में क्या किया जाए, इसे लेकर स्थानीय सांसद व केंद्रीय योजना, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने जीएमडीए, एचएसआईआईडीसी, जिला प्रशासन से लेकर एनएचएआई के अधिकारियों के साथ शुक्रवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में बैठक की। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
बैठक में उठा सुरक्षा को खतरे का मुद्दा

बैठक में विशेष रूप से पहुंचे संवेदनशील क्षेत्र के अधिकारी ने साफ तौर पर कह दिया कि प्रस्तावित जगह पर यदि टोल प्लाजा बनाया जाता है तो इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। इस पर राव इंद्रजीत सिंह ने अधिकारियों से कहा कि अब आगे क्या किया जा सकता है, इस बारे में मंथन करने के बाद पूरा खाका तैयार कर मंगलवार तक उनके कार्यालय में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय स्तर पर समन्वयक बैठक की जाएगी। बैठक में समाधान निकाला जाएगा।
ग्रामीणों ने की फ्लाईओवर बनाने की मांग

लंबे समय से दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर खेड़कीदौला में संचालित टोल प्लाजा को हटाने या स्थानांतरित करने की मांग चल रही है। मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने पचगांव चौक के नजदीक केएमपी एक्सप्रेसवे से पहले टोल प्लाजा बनाने का प्लान तैयार कर काम शुरू कर दिया था। काम शुरू होते ही आस-पास के ग्रामीणों ने चौक पर अंडरपास या फ्लाईओवर बनाने की मांग तेज कर दी। मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने पचगांव चौक से मानेसर की तरफ सहरावन गांव के नजदीक टोल प्लाजा बनाने काे झंडी दिखा दी। साथ ही पचगांव चौक पर दिल्ली-जयपुर हाईवे को एलिवेटेड किए जाने की मंजूरी दे दी गई।
संवेदनशील क्षेत्र के अधिकारी सहमत नहीं हुए

टोल प्लाजा बनाने को लेकर साफ-सफाई का काम शुरू हो चुका था। जल्द ही सिविल वर्क चालू होने वाला था। बताया जाता है कि जैसे ही संवेदनशील क्षेत्र के अधिकारी को नजदीक में टोल प्लाजा बनाने की जानकारी हुई। इस पर उन्होंने आपत्ति जता दी। ऐसे में एनएचएआई द्वारा आगे काम करना मुश्किल हो गया है। एनएचएआई के अधिकारी ने तर्क दिया कि टोल प्लाजा व आस-पास जो कैमरे लगाए जाएंगे वे केवल वाहनों की नंबर प्लेट को ही रीड करेंगे, लेकिन संवेदनशील क्षेत्र के अधिकारी सहमत नहीं हुए।
मानेसर की तरफ बढ़ना मुश्किल

इसे देखते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने शुक्रवार को प्रधान सलाहकार (शहरी विकास) डीएस ढेसी, उपायुक्त अजय कुमार, एसडीएम मानेसर दर्शन यादव, एचएसआईआईडीसी के एजीएम राजीव गोयल, एनएचएआई रेवाड़ी के परियोजना निदेशक योगेश तिलक सहित कई अधिकारियों के साथकाफी देर तक मंथन किया। बैठक में यह बात सामने आई कि मानेसर की तरफ बढ़ना मुश्किल है क्योंकि सरकारी जमीन नहीं है।
सीधी कनेक्टिविटी का विशेष ध्यान रखें

पचगांव की तरफ ही कुछ पीछे हटकर टोल प्लाजा बनाया जा सकता है। बैठक में राव इंद्रजीत सिंह ने साफ कहा कि जहां पर भी टोल प्लाजा बने, स्थानीय ग्रामीणों के सुगम आवागमन और प्रमुख मार्गों पर उनकी सीधी कनेक्टिविटी का विशेष ध्यान रखा जाए। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन और एनएचएआइ द्वारा टोल प्लाजा के लिए चिन्हित स्थल का नक्शा भी देखा।
मानेसर में वैकल्पिक मार्ग बनाना आवश्यक

बैठक में केंद्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने मानेसर में हाईवे को एलिवेटेड किए जाने की योजना पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि एलिवेटेड करने का काम शुरू करने से पहले वाहनों के सुगम आवागमन हेतु वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था सुनिश्चित करे। उन्होंने सुझाव दिया कि गुरुग्राम–पटौदी–रेवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण पूरा होने के बाद ही निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाए। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर वाहनों का दबाव कम होगा।

किसी भी विकास योजना का उद्देश्य तभी सार्थक माना जाएगा, जब उसका सीधा लाभ स्थानीय नागरिकों तक पहुंचे। योजनाएं केवल निर्माण या ढांचे तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनमें लोगों की सुविधा और क्षेत्र की सुरक्षा का समुचित समावेश होना आवश्यक है। किसी भी परियोजना पर निर्णय लेने से पहले ग्रामीणों की आवश्यकताओं, यातायात की सहजता और भविष्य में क्षेत्र के औद्योगिक विस्तार पर उसके प्रभाव का संतुलित मूल्यांकन किया जाए।

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