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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हमारी डाइट में ज्यादातर भारतीय प्रोटीन काफी कम मात्रा में शामिल करते हैं। दिन भर में सिर्फ एक कटोरी दाल पीना आपकी प्रोटीन की जरूरत को पूरा नहीं कर पाता। इसलिए जरूरी है कि हर मील के साथ आप प्रोटीन जरूर लें, ताकि शरीर में इसकी कमी न हो।
ब्रेकफास्ट में प्रोटीन भरपूर मात्रा में हो, तो यह न केवल आपको दिनभर एनर्जेटिक रखता है, बल्कि मांसपेशियों की मरम्मत और वजन घटाने में भी मदद करता है। ऐसे में कुछ खास तरह के डोसा (Protein Dosa Recipes) काफी अच्छा ऑप्शन साबित हो सकते हैं।
मिक्स दाल डोसा (Adai Dosa)
पारंपरिक चावल के डोसा की तुलना में मिक्स दाल डोसा प्रोटीन का पावरहाउस है। इसमें अरहर, चना, मूंग और उड़द दाल का मिश्रण इस्तेमाल किया जाता है। सभी दालों को बराबर मात्रा में लेकर 4-5 घंटे भिगो दें। इसमें अदरक, हरी मिर्च और हींग डालकर गाढ़ा बैटर पीस लें। यह डोसा फाइबर और जटिल कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है।
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स्प्राउटेड मूंग डोसा (Pesarattu)
अंकुरित मूंग दाल स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें विटामिन-सी और प्रोटीन की मात्रा सामान्य दाल से ज्यादा होती है। अंकुरित मूंग को थोड़े से जीरे और हरी मिर्च के साथ पीस लें। इसमें थोड़ा-सा चावल का आटा मिलाने से डोसा कुरकुरा बनता है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो लो-कैलोरी लेकिन हाई-प्रोटीन डाइट पर हैं।
पनीर स्टफ्ड डोसा (Paneer Dosa)
पनीर शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का सबसे अच्छा सोर्स है। अगर आप साधारण डोसा को कुछ खास बनाना चाहते हैं, तो पनीर स्टफिंग सबसे अच्छा ऑप्शन है। डोसा के बैटर को तवे पर फैलाएं और बीच में कद्दूकस किया हुआ पनीर, कटा हुआ प्याज, टमाटर और चाट मसाला भरें। पनीर में मौजूद कैल्शियम और प्रोटीन हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
काला चना डोसा (Kala Chana Dosa)
काला चना आयरन और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का एक बेहतरीन सोर्स है। यह डोसा दिखने में थोड़ा गहरा होता है लेकिन स्वाद में लाजवाब। काले चने को रातभर भिगोकर रखें और सुबह पीसकर बैटर तैयार करें। इसे और ज्यादा पौष्टिक बनाने के लिए इसमें बारीक कटा हुआ पालक भी मिलाया जा सकता है। यह एनीमिया से जूझ रहे लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है।
ब्रेकफास्ट में प्रोटीन डोसा के फायदे
- मसल्स बिल्डिंग- प्रोटीन मांसपेशियों के विकास के लिए जरूरी है।
- मेटाबॉलिज्म- हाई-प्रोटीन नाश्ता मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे फैट बर्न करने में मदद मिलती है।
- शुगर कंट्रोल- दालों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता।
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