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क्या टैरिफ नीति पर ट्रंप को लगेगा झटका? भारतीय मूल के वकील नील कत्याल ने SC में दी राष्ट्रपति को चुनौती

Chikheang 2025-11-4 19:37:07 views 1206
  

भारतीय मूल के वकील नील कत्याल ने SC में दी राष्ट्रपति को चुनौती।  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दुनिया के कई देशों पर टैरिफ थोपा है। जहां ट्रंप अपने इस फैसले को अमेरिका के हक में बता रहे हैं, तो दूसरी ओर अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर 5 नवंबर से सुनवाई होनी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस केस को इतिहास में सबसे खास करार दिया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

दरअसल, इस मामले में भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल बुधवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ पेश होंगे। माना जा रहा है कि इसी सुनवाई में तय होगा कि राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की शक्ति कितनी है और अमेरिका की व्यापार नीति का नियंत्रण किसके पास भविष्य में रहेगा।
मामले में क्या दी गई चुनौती?

बता दें कि इस टैरिफ के मामले में चुनौती दी गई है कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम के तहत अधिकारों का दुरुपयोग किया है, जो अमेरिका के राष्ट्रपति को विदेशी संकटों के दौरान कार्रवाई करने का शक्ति प्रदान करता है।

हाल में ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर एक पोस्ट में कहा कि अगर हम हार गए, तो हमारा देश लगभग तीसरी दुनिया के दर्जे का हो जाएगा। ईश्वर से ये प्रार्थना है कि ऐसा न हो।
जानिए कौन हैं नील कत्याल

  • नील कत्याल मूल तौर पर एक प्रमुख भारतीय-अमेरिकी वकील और अमेरिका के पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल रहे हैं। काल्याल वाशिंगटन मिलबैंक एलएलपी में भागीदार हैं।
  • मिवबैंक वेबसाइट के पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, उनका व्यवसाय पेटेंट, प्रतिभूति, आपारधिक, रोजगार और संवैधानिक कानू में अपीलीय और जटिल मुकदमेबाजी पर केंद्रित है।
  • कत्याल ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 52 मामलों की पैरवी की है और उनका 53वां और 54वां मुकदमा अगले साल जनवरी में निर्धारित है। मिलबैंक में शामिल होने से पहले कत्याल ओबामा प्रशासन के तहत कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल के रूप में कार्यरत थे।
  • जानकारी के अनुसार, नील कत्याल जॉर्ज विश्वविद्यालय लॉ सेंटर में करीब 20 साल तक पढ़ाया है और कम उम्रम में ही अध्यक्षीय प्रोफेसर का पद प्राप्त कर लिया था। वे हार्वर्ड और येल लॉ स्कूलों में विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे हैं। साल 2011 में नील को न्याय विभाग का सर्वोच्च नागरिक सम्मान एडमंड रैंडोल्फ पुरस्कार भी मिला है।


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