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क्यूएस की एशियाई रैंकिंग में चमके फिर गोरखपुर विश्वविद्यालय और MMUT, अंकों में आई गिरावट

cy520520 2025-11-5 18:06:56 views 975
  



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित रैंकिंग संस्थान ‘क्यूएस’ ने मंगलवार को एशियाई देशों के उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग जारी कर दी है। इसमें गोरखपुर के दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को चमकने में सफलता मिली है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

गोरखपुर विश्वविद्यालय ने लगातार तीसरी बार और एमएमयूटी ने दूसरी बार रैंकिंग मेंं जगह बनाई है। क्यूएस की दक्षिण एशियाई देशों की रैंकिंग में गोवि 330वें स्थान पर है। एमएमयूटी ने 421वीं रैंक पर जगह बनाई है। एशियाई देशों की रैंकिंग में गाेवि 1001-1100 के बैंड में जगह बनाने में सफल रहा है। प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को एशियाई देशों की रैंकिंग में 1301-1400 बैंड में जगह मिली है।

डीडीयू के समग्र स्कोर में 55 फीसदी की वृद्धि

क्वाक्वेरेली साइमंड्स (क्यूएस) की ओर से जारी इस प्रतिष्ठित रैंकिंग में डीडीयू ने अपना समग्र स्कोर 15.5 कर लिया है। पिछले वर्ष यह स्कोर 10 था। यानी इस बार स्कोर में 55 प्रतिशत की वृद्धि की है। पीएचडी धारक शिक्षकों का अनुपात भी 73.5 से बढ़कर 86 हो गया है। फैकल्टी-स्टूटेंड रेशियो भी घटकर 26.9 से 24.1 हो गया है। अंतरराष्ट्रीय शोध नेटवर्क में डीडीयू ने अपना स्कोर 2.7 से बढ़ाकर 20.9 कर लिया, जो सात गुना वृद्धि है। एकेडमिक रेप्यूटेशन 7.3 से बढ़कर 15.2 हुआ। प्रति शिक्षक शोधपत्र भी 5.4 से बढ़कर 8.2 हुआ है। इनका इस रैंकिंग में बड़ा योगदान रहा।

एमएमयूटी का समग्र स्कोर है पिछले वर्ष से दोगुणा
एमएमयूटी का ओवरआल स्कोर दोगुणे से भी अधिक (4.7 से बढ़कर 9.5) हो गया है। शोध पत्र प्रति फैकल्टी स्कोर 27.6 से 45.9 हो गया है। पीएचडी धारक फैकल्टी बिंदु पर स्कोर 1.6 से 17.8 (1012 प्रतिशत वृद्धि) हो गया है। अंतरराष्ट्रीय शोध नेटवर्क बिंदु पर स्कोर 1.5 से 11.9 (693 प्रतिशत वृद्धि) हो गया है। इसी प्रकार, कुल शोध पत्र की संख्या 1266 से 1508 हो गई है।

पिछले वर्ष की तुलना में रैंकिंग में गिरावट
गोरखपुर विश्वविद्यालय और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की रैंकिंग में पिछले वर्ष की तुलना में इस बार गिरावट आई है। गोवि को सत्र 2024 के लिए जारी दक्षिण एशियाई रैंकिंग रैंकिंग में 258वां स्थान मिला था। एशिया रैंकिंग में भी यह विश्वविद्यालय 801-850 के बैंड में शामिल रहा था। सत्र 2025 की रैंकिंग में दक्षिण एशिया में 240वां स्थान मिला था। एशिया रैंकिंग में भी 751-800 के बैंड में शामिल था। एमएमयूटी को पिछले वर्ष पहली बार इस रैंकिंग में शामिल किया गया था। दक्षिण एशिया में एमएमयूटी को 292वां स्थान मिला था। एशिया रैंकिंग में भी 901-1000 के बैंड में शामिल था।

ज्यादा संस्थानों के शामिल होने से गिरी रैंकिंग
इस बार अधिक संस्थानों के रैंकिंग में शामिल होने को गिरावट का कारण बताया जा रहा है। दोनों संस्थानों ने पिछले वर्ष की तुलना में रैंकिंग के सभी बिंदुओं पर सुधार किया है। इस वर्ष क्यूएस ने 1.98 करोड़ शोधपत्रों और 20 करोड़ साइटेशनों का विश्लेषण किया, जो अब तक का सबसे व्यापक आकलन है।


रैंकिंग में निरंतर सुधार हमारे संकाय, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के सामूहिक परिश्रम और प्रतिबद्धता का परिणाम है। समग्र स्कोर में 55 प्रतिशत की वृद्धि हमारे शोध, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर केंद्रित दृष्टिकोण की सफलता को दर्शाती है। हमारा लक्ष्य है कि डीडीयू पूर्वी उत्तर प्रदेश को ज्ञान, नवाचार और वैश्विक शिक्षण का केंद्र बने।
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-प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय


यह उपलब्धि हमारे समर्पित फैकल्टी, शोधकर्ताओं एवं छात्रों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। बढ़ती प्रतिभागिता के बावजूद सभी बिंदुओं पर हमारा प्रदर्शन पहले से बहुत अच्छा रहा है। इससे हमारी बढ़ती शैक्षणिक उत्कृष्टता का पता चलता है। आगे और बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
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- प्रो. जेपी सैनी, कुलपति, एमएमयूटी
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