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खाली टेबल होने के बावजूद क्यों कुछ रेस्टोरेंट के बाहर लगा होता है ‘सीट फुल’ का बोर्ड? यहां पढ़ें वजह

LHC0088 2025-10-7 21:34:43 views 1139
  रेस्टोरेंट के बाहर क्यों लगाते हैं सीट फुल का बोर्ड? (Picture Courtesy: Freepik)





लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आपने कई बार देखा होगा कि कुछ रेस्टोरेंट के बाहर \“फुल\“ या \“सीटें भरी हुई हैं\“ का बोर्ड लगा होता है, लेकिन अंदर टेबल खाली होती है। यह देखकर मन में सवाल तो आता ही है कि अगर सीट खाली है, तो फुल का बोर्ड क्यों लगाया गया है। क्या रेस्टोरेंट पैसे नहीं कमाना चाहता? लेकिन ऐसा नहीं है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

दरअसल, टेबल खाली होने के बावजूद बाहर फुल का बोर्ड लगाने के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हैं। ऐसा रेस्टोरेंट आए गेस्ट्स के एक्सपीरिएंस को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। आइए जानते हैं कैसे।



  

(Picture Courtesy: Freepik)
बेहतर सर्विस के लिए

खाली टेबल होने के बावजूद \“फुल\“ का बोर्ड लगाने का सबसे बड़ा कारण रेस्टोरेंट की सर्विस की क्वालिटी बनाए रखना है।

  • किचन का भार और स्टाफिंग- रेस्टोरेंट सिर्फ सीटों की संख्या से नहीं चलते, बल्कि इस बात से चलते हैं कि किचन स्टाफ और वेटर्स कितनी तेजी और सटीकता से काम कर सकते हैं। अगर वे एक साथ बहुत सारे ऑर्डर ले लें, तो खाना बनाने और परोसने में देरी होगी, जिससे ग्राहकों को इंतजार करना पड़ेगा और उनका एक्सपीरिएंस खराब होगा। \“फुल\“ का बोर्ड लगाकर, रेस्टोरेंट ग्राहकों के आने की गति को कंट्रोल करता है, ताकि मौजूदा ग्राहकों को बेहतरीन और समय पर सर्विस मिल सके।
  • कर्मचारियों के वर्कलोड को मैनेज करना- रेस्टोरेंट में अक्सर वेटर्स को अलग-अलग सेक्शन दिए जाते हैं। अगर कोई वेटर पहले से ही बिजी है, तो खाली टेबल होने के बावजूद उस सेक्शन में नए ग्राहक को बैठाने से उस वेटर पर काम का बोझ बढ़ जाएगा। इससे सर्विस धीमी हो जाएगी और ग्राहक को पूरा अटेंशन नहीं मिल पाएगा। इस स्थिति से बचने के लिए, होस्ट आने वाले ग्राहकों को मना कर सकते हैं, जब तक कि वेटर अगले टेबल के लिए तैयार न हों।


  



(Picture Courtesy: Freepik)
रेस्टोरेंट के ऑपरेशन से जुड़ी जरूरतें

  • रिजर्व्ड टेबल- कई बार ऐसा होता है कि जो टेबल खाली दिख रही हैं, हो सकता है वे कुछ ही मिनटों या घंटों बाद के लिए बुक हों। रेस्टोरेंट उन रिजर्व टेबलों को उस समय के दौरान किसी \“वॉक-इन\“ ग्राहक को देना नहीं चाहता, क्योंकि इससे बाद में आने वाले ग्राहक के लिए समस्या खड़ी हो सकती है।
  • टेबल को \“टर्न\“ करने में लगने वाला समय- एक ग्राहक के जाने के बाद, टेबल को साफ करने, नए क्रॉकरी-कटलरी लगाने और अगले ग्राहक के लिए तैयार करने में समय लगता है। भले ही टेबल खाली दिख रही हो, लेकिन अगर उसे \“टर्न\“ करने का काम चल रहा है, तो वह तुरंत इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं होती।
  • अचानक हुई समस्याएं- कभी-कभी कर्मचारियों की कमी, कोई तकनीकी खराबी, जैसे- किचन के उपकरण का खराब होना या सामान की कमी जैसी समस्याएं आ जाती हैं। ऐसी स्थिति में, रेस्टोरेंट अपनी क्षमता से कम ग्राहकों को लेना पसंद करते हैं, ताकि वे इन समस्याओं के बावजूद बेहतरीन सर्विस दे सकें।


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