धड़ल्ले से बिना पर्ची के बिक रहे एंटीबायोटिक्स।
जागरण संवाददाता, गाजीपुर। जिले में एंटीबायोटिक दवाओं की काउंटर बिक्री एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) को बढ़ावा देने का बड़ा कारण बनती जा रही है। स्थिति यह है कि सामान्य सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार या मामूली संक्रमण में भी लोग चिकित्सक को दिखाने के बजाय सीधे मेडिकल स्टोर पहुंचकर एंटीबायोटिक खरीद रहे हैं। बिना पर्चे और अधूरी खुराक में ली जा रही ये दवाएं भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बनती जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार जिले में हर महीने करीब 40 से 50 करोड़ रुपये की दवाओं की बिक्री होती है। इसमें लगभग 30 प्रतिशत यानी करीब एक करोड़ रुपये की एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन एंटीबायोटिक्स की अधिकांश बिक्री काउंटर से बिना चिकित्सकीय परामर्श के हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह स्थिति और भी गंभीर है, जहां लोग दवा दुकानदार की सलाह पर एंटीबायोटिक ले लेते हैं।
स्थानीय स्तर पर कई मेडिकल स्टोरों पर बिना पर्चे एंटीबायोटिक दवाएं खुलेआम बेची जा रही हैं। कई मरीजों ने बताया कि वे दो-तीन दिन दवा खाने के बाद खुद ही दवा छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार यही अधूरा इलाज एएमआर को जन्म देता है।
जिला केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि मरीज खुद एंटीबायोटिक की मांग करते हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बिना पर्चे एंटीबायोटिक की बिक्री नियमों का उल्लंघन है और इसे रोकने के लिए निगरानी और सख्ती जरूरी है।
जिले में महीने में करीब 40 से 50 करोड़ रुपये के दवाओं की विक्री होती है। इसमें 30 प्रतिशत एंटीबायोटिक्स है। बिना चिकित्सकीय परामर्श के एंटीबायोटिक्स लेना किसी भी कीमत पर सही नहीं है। आंकड़ों को देखें तो इसका बहुत दुरूपयोग भी होता है। मरीज अक्सर खुद एंटीबायोटिक की मांग करते हैं। जब तक जनजागरूकता नहीं बढ़ेगी, समस्या बनी रहेगी। -नागमणि मिश्रा, अध्यक्ष- गाजीपुर ड्रगिस्ट एवं केमिस्ट एसोसिएशन। |
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