दिल्ली का पहला मॉडल श्मशान घाट तैयार हो चुका है।
निहाल सिंह, नई दिल्ली। अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों तथा करीबी लोगों की असुविधा को ध्यान में रखकर दिल्ली का पहला मॉडल श्मशान घाट तैयार हो चुका है। खास बात कि पवित्र यमुना नदी के किनारे काले खां में तैयार किया गया है। इस प्रकार यह दिल्ली का चौथा श्मशान घाट है, जो नदी किनारे है।
यहां, अंतिम विदाई देने आने वाले लोगों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा गया है। आने वाले लोग धूप व वर्षा के साथ अन्य असुविधाओं से बच सकेंगे। धुंआ भी परेशान नहीं करेगा। इसे एमसीडी ने तैयार किया है। नगर निगम के एक अधिकारी के अनुसार, मुख्य मार्ग से श्मशान घाट तक संपर्क मार्ग तथा मुख्य द्वार का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद उसे कुछ माह में शुरू कर दिया जाएगा।
एमसीडी के अनुसार, यह इसलिए मॉडल श्मशान घाट है, क्योंकि उसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यहां जलने वाली चिंताओं से निकलने वाला धुंआ लोगों को परेशान नहीं करेगा। बल्कि धूप, वर्षा से बचने के लिए यहां पर टेंटरूप पंडाल के इंतजाम किए गए हैं। अभी तक दिल्ली में तीन श्मशान घाट हैं जो यमुना किनारे हैं।
इसमें गीता कालोनी, वजीराबाद, निगम बोध घाट हैं। चूंकि यमुना निगम बोघ घाट के किनारे हैं और यहां पर गंगा जल से अंतिम यात्रा के स्नान की सुविधा है इसलिए सर्वाधिक अंतिम संस्कार यही होते हैं। एमसीडी ने यह श्मशान घाट हैदराबाद के बंजारा हिल्स की तर्ज पर विकसित किया है। उसके लिए एमसीडी की टीम करीब तीन वर्ष पूर्व हैदराबाद स्थित श्मशान घाट का निरीक्षण किया था।
निगम के अनुसार पांच करोड़ की लागत से बने इस श्मशान घाट को तैयार किया है। इसमें 16 चिताओं के प्लेटफार्म बनाए हैं जबकि दो चिता प्लेटफार्म विशिष्ट लोगों के अंतिम संस्कार के लिए हैं। एमसीडी ने 15,544 वर्ग मीटर क्षेत्र अंतिम संस्कार स्थल तैयार किए हैं जबकि 750 वर्ग मीटर में शौचालय, पीने का पानी व रजिस्ट्रेशन आफिस बनाया गया है।
श्मशान घाट परिसर में पार्किग के साथ ही बाहरी स्थान को भी पार्किंग स्थल के तौर पर विकसित किया जाएगा। वहीं, इसका एक विशाल द्वार बनाया हैं जहां भोले बाबा की मूर्ति लगाई जाएगी। इसके बाद प्रवेश के दौरान सफेद रंग की शंकर जी 10 फिट की मूर्ति लगाई है। वहीं, पिंडदान के लिए दो प्लेटफार्म बनाए गए हैं। जिसमें वर्षा और धूप से बचने का स्थान है।
गंगा के पानी से ही होगा अंतिम स्नान
दिल्ली में सर्वाधिक मांग निगम बोध श्मशान घाट की रहती है। यमुना के किनारे और अंतिम स्नान में गंगा का पानी का उपयोग होने की वजह से लोग यहां पर आते हैं। इसी तर्ज पर सराय काले खां श्मशान घाट को विकसित किया गया है। यहां पर भी लोगों के पीने के लिए जाने वाले गंगा वाटर को अंतिम स्नान के लिए उपयोग किया जाएगा। अंतिम स्नान के लिए बनाए गए प्लेटफार्म के ऊपर बने एक प्लेटफार्म पर गंगा जी की मूर्ति भी स्थापित होगी। सबसे पहले यह सुविधा निगम बोघ घाट पर शुरू की गई थी।
जब किसी के परिवार से कोई व्यक्ति चला जाता है तो वह पहले से ही भारी दुख में होता है। ऐसे में वहां पर चलने और बैठने व खड़े होने के लिए पर्याप्त स्थान हो और लोगों को परेशानी न हो इसके तहत इसे डिजाइन किया गया है। - राजा इकबाल सिंह, महापौर, दिल्ली |
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