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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। साल 2011 में करंट लगने की दर्दनाक दुर्घटना में दोनों हाथ और एक पैर गंवाने वाले युवक रमण स्वामी को आखिरकार न्यायिक राहत मिली है।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड पंचकूला को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह रमण को आधुनिक कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने के लिए टेंडर जारी करने सहित सभी आवश्यक औपचारिक कदम उठाए और इसकी जानकारी अदालत को दे।
पानीपत जिले के सनौली खुर्द गांव का निवासी रमण स्वामी महज पांच वर्ष का था, जब तीन नवंबर 2011 को उसके घर की छत के ऊपर से नीचे लटक रही हाई-टेंशन बिजली की तार की चपेट में आ गया।
हादसा इतना भयावह था कि रमण के दोनों हाथ और बायां पैर काटना पड़ा। बचपन में ही जीवनभर का शारीरिक संघर्ष झेलने को मजबूर हुए रमण के मामले में हाईकोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इलाज और पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।
इससे पहले अगस्त 2025 में पारित अंतरिम आदेश में हाईकोर्ट ने हरियाणा के डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज को निर्देश दिया था कि आर्थोपेडिक विशेषज्ञों का एक मेडिकल बोर्ड गठित कर रमण के इलाज के सभी संभावित विकल्पों पर विचार किया जाए, जिनमें अंग प्रत्यारोपण (लिंब ट्रांसप्लांट) की संभावना भी शामिल हो।
इसी आदेश के अनुपालन में छह अगस्त 2025 को रमण की पीजीआइ रोहतक में मेडिकल बोर्ड द्वारा विस्तृत क्लिनिकल और रेडियोलाजिकल जांच की गई। |
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