जोधपुर झाल में अठखेलियां करते विदेशी पक्षी।
मथुरा, जागरण संवाददाता। फरह का जोधपुर झाल आने वाले समय में पर्यटन के नक्शे पर चमकेगा। बर्ड सेंचुरी की तर्ज पर इसे विकसित किया जा रहा है। यहां देशी-विदेशी प्रजाति के पक्षियों की आमद शुरू हो गई है। इसे विकसित करने का जिम्मा तीर्थ विकास परिषद ने अपने हाथ में लिया है, ये काम वन विभाग करा रहा है।
मथुरा, आगरा व भरतपुर के मध्य जोधपुर झाल 64 हेक्टेयर में बसा है। टर्मिनल नहर व सिकंदरा रजबहा के मध्य चार किलोमीटर क्षेत्र में फैले वेटलैंड के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित किया जा रहा है। ईको सिस्टम के तहत विकास हो रहा है। प्रवासी पक्षियों के अनुकूल हेविटाट विकसित किए गए हैं।
पक्षियों के प्रजनन को बढ़ाने और सुरक्षित करने के लिए झाल में घना जंगल बनाया जा रहा है। सात वाटर बाडी, 13 आइसलैंड, 13 हट के साथ 2200 रनिंग मीटर नेचर वाॅक बनाए गए हैं। पर्यटकों के लिए वाॅच टावर, अध्ययन केंद्र, सेमिनार हाल, पार्किंग, कैंटीन आदि सुविधाएं विकसित कराई गई हैं।
इस बार आए ये पक्षी
जोधपुर झाल वेटलैंड पर स्थलीय व जलीय प्रवासी पक्षी आते हैं। यहां 142 आवासीय व 50 प्रवासी प्रजाति रिकार्ड की गई हैं। ग्रेटर फ्लेमिंगो, रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, कामन पोचार्ड, काटन पिग्मी गूज, बार-हेडेड गूज, पाइड एवोसेट, नार्दर्न शावेलर, ब्लैक-टेल्ड गाडविट, टफ्टिड डक, ब्लूथ्रोट, कामन टील की यहां चहल पहल है।
इनके अलावा नार्दर्न पिंटेल, ग्रेलैग गूज, रूडी शेल्डक, मल्लार्ड, यूरेशियन कूट, यूरेशियन विजन, सिट्रिन वेगटेल, जैकोबिन कूको, यूरेशियन स्पूनबिल, ग्रेटर स्पाटेड ईगल, ब्लिथ रीड वार्बलर, पेंटेड स्टार्क, रायनेक यहां प्रमुख रूप से आ चुके हैं।
50 से अधिक प्रजाति के पक्षी करते प्रजनन
जोधपुर झाल पर आइयूसीएन की रेड डाटा सूची के अनुसार लुप्तप्राय और निकट संकटग्रस्त पक्षियों की 15 प्रजातियां पाई गईं। इसमें 50 से अधिक प्रजाति जोधपुर झाल पर प्रजनन करती हैं।
इनमें सारस क्रेन, ब्लैक-ब्रेस्टेड वीवर, स्ट्रीक्ड वीवर, बाया वीवर, गोल्डन ओरिओल, वूली-नेक्ड स्टॉर्क, स्ट्रॉबेरी फिंच, सिल्वरबिल, स्कैली ब्रेस्टेड मुनिया, तिरंगी मुनिया, ग्रीन बी-ईटर, इंडियन रोलर, ग्रे हार्नबिल, कापर स्मिथ बारबेट, ब्लैक फ्रैंकलिन, लेशर विशलिंग डक, पिजेंट टेल्ड जैकाना, ब्रोंज बिंग्ड जैकाना, स्पाट-बिल बतख, ग्रेटर पेंटेड स्नाइप, ग्रे-हेडेड स्वैम्पेन, लिटिल ग्रीव शामिल हैँ। |