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हरियाणा में भ्रष्टाचार मामले में IAS विजय दहिया दोषमुक्त, अभियोजन स्वीकृति न मिलने से रुकी कार्यवाही

deltin33 1 hour(s) ago views 905
  

अदालत ने कहा कि अभियोजन स्वीकृति के अभाव में कानून के तहत आगे की कार्यवाही नहीं की जा सकती।



जागरण संवाददाता, पंचकूला। पंचकूला अदालत ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आईएएस विजय सिंह दहिया को दोषमुक्त कर दिया है। यह निर्णय राज्य सरकार द्वारा उनके खिलाफ अभियोजन की अनुमति देने से इनकार किए जाने के बाद लिया गया। अदालत ने कहा कि अभियोजन स्वीकृति के अभाव में कानून के तहत आगे की कार्यवाही नहीं की जा सकती।

यह मामला राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि जांच पूरी होने के बाद वर्ष 2024 और 2025 में सक्षम प्राधिकारी से विजय दहिया के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी गई थी।

हालांकि, हरियाणा के मुख्य सचिव कार्यालय ने 9 जनवरी 2026 को पत्र जारी कर अभियोजन स्वीकृति देने से मना कर दिया। इसके चलते ब्यूरो ने अदालत को सूचित किया कि वह विजय दहिया के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत करने की स्थिति में नहीं है।

इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिक्रमजीत अरोड़ा की अदालत में हुई। न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 19 के अनुसार किसी लोक सेवक के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए वैध अभियोजन स्वीकृति अनिवार्य है। यदि स्वीकृति नहीं है तो अदालत उस मामले में संज्ञान लेने से कानूनी रूप से बाधित होती है।

अदालत ने पारित आदेश में स्पष्ट किया कि विजय सिंह दहिया को दोषमुक्त किया जाना केवल अभियोजन स्वीकृति के अभाव तक सीमित है। यदि भविष्य में कानून के अनुसार वैध स्वीकृति प्रदान की जाती है, तो अभियोजन एजेंसी को आगे की कार्यवाही करने से नहीं रोका जाएगा।

यह आदेश मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं माना जाएगा। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इस आदेश का अन्य सह-आरोपितों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और उनके खिलाफ कार्यवाही कानून के अनुसार जारी रहेगी।
50 लाख के बिल पास करवाने के लिए रिश्वत का मामला

शिकायतकर्ता रिंकू मंचंदा फतेहाबाद में एक शैक्षणिक संस्थान का संचालन कर रहा था। यह संस्थान हरियाणा कौशल विकास मिशन के अंतर्गत कार्यरत था, जिसके लगभग 50 लाख रुपये के बिल लंबित थे। आरोप है कि तत्कालीन मुख्य कौशल अधिकारी दीपक शर्मा ने बिल पास करवाने के लिए मंचंदा को पूनम चोपड़ा से मिलने के लिए कहा।

आरोपों के अनुसार पूनम चोपड़ा ने कहा कि वह इस संबंध में तत्कालीन युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग के आयुक्त एवं सचिव विजय दहिया से बातचीत करेंगी। इसके बदले उन्होंने बिल पास करवाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग की, जिसमें से दो लाख रुपये मंचंदा ने दे दिए।

इसके बाद सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पूनम चोपड़ा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। बताया गया कि चोपड़ा ने चंडीगढ़ के एक रेस्ट्रोरेंट में विजय दहिया को फोन भी किया था। इसी कड़ी में अक्टूबर 2023 में विजय दहिया को गिरफ्तार किया गया था।
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