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चंडीगढ़ में CBG प्लांट शुरू होने में लगेगा समय, क्या तब तक कचरे का पहाड़ खड़ा होने से राेक पाएगा निगम?

LHC0088 5 hour(s) ago views 340
  

डड्डूमाजरा स्थित डंपिंग ग्राउंड पर फिर से कचरे का पहाड़ खड़ा होने का खतरा।



बलवान करिवाल, चंडीगढ़। शहर के कचरा प्रबंधन की बड़ी उम्मीद बने कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट को जमीन तो मिल गई है, लेकिन इसके चालू होने में अभी लगभग तीन साल का वक्त लगेगा।

इस अंतराल में रोजाना निकलने वाले कचरे को कैसे संभाला जाएगा, यह नगर निगम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। यदि इस अवधि में गीले कचरे का सही तरीके से प्रोसेस नहीं हुआ तो डंपिंग ग्राउंड पर फिर से कचरे का पहाड़ खड़ा होने का खतरा है।

सोमवार को नगर निगम ने इंडियन ऑयल काॅरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) को सीबीजी प्लांट के लिए दस एकड़ जमीन सौंप दी। इसके साथ ही पांच एकड़ अतिरिक्त जमीन भी चिह्नि कर छोड़ी गई है, जिसे जरूरत पड़ने पर उपलब्ध कराया जाएगा।

यह जमीन एक रुपये की लीज पर दी गई है। हालांकि अभी सभी वैधानिक मंजूरियां मिलना बाकी हैं। मौजूदा टाइमलाइन के अनुसार प्लांट दिसंबर 2028 में ही संचालन में आ सकेगा।

यह प्लांट पूरी तरह से सेग्रीगेटिड ऑर्गेनिक म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट पर आधारित होगा। रोजाना 200 टन गीले कचरे और 30 टन गोबर से लगभग आठ टन सीबीजी का उत्पादन किया जाएगा। परियोजना पर करीब 125 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसे आईओसीएल अपने संसाधनों से वहन करेगी। नगर निगम को किसी प्रकार का वित्तीय बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
दो साल का अंतराल, बढ़ी जिम्मेदारी

प्लांट शुरू होने तक का समय निगम के लिए बेहद अहम है। इस दौरान कचरे का सेग्रीगेशन और अस्थायी प्रोसेसिंग सुचारू नहीं रही तो स्थिति बिगड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीजी प्लांट की सफलता पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि निगम कितना साफ-सुथरा और अलग किया हुआ गीला कचरा उपलब्ध करा पाता है।
डंपिंग ग्राउंड से ही बिकेगी सीबीजी

प्लांट के संचालन के बाद आईओसीएल डंपिंग ग्राउंड परिसर में ही सड़क किनारे सीबीजी का रिटेल आउटलेट स्थापित करेगी। यहां आम वाहन भी गैस भरवा सकेंगे। नगर निगम के कचरा एकत्र करने वाले वाहन भी चरणबद्ध तरीके से सीबीजी पर चलाए जाएंगे, जिससे ईंधन खर्च और प्रदूषण दोनों में कमी आएगी।
मिश्रित कचरे की भी छूट

समझौते के तहत इंडियन आयल को 10 प्रतिशत तक मिश्रित कचरा लेने की शर्त रखी गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि शत-प्रतिशत सेग्रीगेशन न होने की स्थिति में भी प्लांट को चलाने की व्यवस्था की गई है।
अन्य शहरों में सफल मॉडल

आईओसीएल के अनुसार गोरखपुर, ग्वालियर और तमिलनाडु के नामक्कल समेत कई शहरों में सीबीजी प्लांट सफलतापूर्वक चल रहे हैं। चंडीगढ़ में बनने वाला प्लांट भी इसी मॉडल पर आधारित होगा। सीबीजी की कीमत बाजार में उपलब्ध सीएनजी के बराबर रहने की संभावना है और बीएस इंजन वाले वाहनों में इसका माइलेज भी लगभग समान होगा।

कुल मिलाकर, सीबीजी प्लांट चंडीगढ़ के लिए दीर्घकालीन समाधान है, लेकिन दिसंबर 2028 तक का सफर आसान नहीं है। इस दौरान कचरा प्रबंधन की हर चूक भविष्य की परेशानी को और बढ़ा सकती है।
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