जागरण संवाददाता, लखनऊ। इंस्टीट्यूट आफ रोड ट्रैफिक एजूकेशन (आइआरटीई) के अध्यक्ष डा. रोहित बलूजा ने कहा है कि यूपी में हर साल 40 हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो रही, इन घटनाओं की 90 प्रतिशत एफआइआर में सिर्फ वाहन का ड्राइवर जिम्मेदार बनाया जा रहा, आखिर ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बांटने वाले, वाहनों की जांच करने वाले व सड़क बनाने वालों सहित अन्य संस्थाओं को कटघरे में क्यों नहीं खड़ा किया जा रहा?
जब तक घटनाओं की तह में नहीं जाएंगे, तब तक सड़क दुर्घटनाओं व जगह-जगह लगने वाले जाम पर अंकुश नहीं लगा सकते। पूछा, जिन ड्राइवरों की सही से जांच नहीं हो पा रही उनको डीएल रेवड़ी की तरह क्यों बांटे जा रहे?
पीडब्ल्यूडी के विश्वेश्वरैया सभागार में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता व दक्षता को विकसित करने की दो दिवसीय कार्यशाला के समापन में आइआरटीई के अध्यक्ष डा. बलूजा ने सड़क दुर्घटनाओं व जाम की वजह बताते हुए कहा, पुलिस ओवर स्पीडिंग व अनियंत्रित ड्राइविंग की एफआइआर इसीलिए दर्ज करती है, क्योंकि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 281 के तहत यह लिखना जरूरी है।
ऐसे ही गंभीर दुर्घटना में बीएनएस की धारा 106 लिख दी जाती है। उन्होंने दो टूक कहा, पुलिस की एफआइआर, जांच से घटना की असली वजह पता नहीं लगाई जा सकती। हिमाचल, उत्तराखंड व यूपी की ही अन्य घटनाओं से संबंधित वीडियो व चित्रों को दिखाकर समझाया कि हादसे की जांच में सामने आया था कि सड़क काफी संकरी थी, जगह-जगह गड्ढे थे, हादसे का शिकार वाहन ओवरलोड था, तब क्या इनसे जुड़े विभागों की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती?
डा. बलूजा ने कहा, सड़क को सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहले असुरक्षा यानी कारणों को जानना होगा। बीमार (ड्राइवर) को पकड़ने से काम नहीं चलेगा बीमारी (पूरे सिस्टम) को ठीक करने पर समस्या का समाधान होगा।
वाहन सात तरह से ओवरटेक करते हैं, कौन सी ओवरटेकिंग हुई यह जांच में पता नहीं चलता। घटना के कुछ घंटों बाद ही हादसे के शिकार वाहन को यह कहते हुए हटा दिया जाता है कि आवागमन सुचारु हो, जबकि इस हरकत से घटना की वजह तलाशना मुश्किल होता है।
साफ कहा, सड़क, परिवहन, पुलिस सहित अन्य संस्थाओं पर जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी तब तक हादसे व जाम की समस्या खत्म नहीं होगी। यहां पर परिवहन आयुक्त किंजल सिंह, अपर परिवहन आयुक्त आइटी सुनीता वर्मा, अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन संजय सिंह, आरटीओ प्रशासन संजय कुमार तिवारी सहित अन्य मौजूद रहे।
रोडवेज के ड्राइवर 10-10 घंटे चला रहे बसें
मोटर ट्रांसपोर्ट वर्कर एक्ट में किसी भी ड्राइवर से आठ घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकता, जबकि परिवहन निगम के ड्राइवर 10-10 घंटे बसें चला रहे हैँ। ओवर ड्यूटी से भी हादसा हो सकता है, इस पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी किसकी है। कार्यशाला में बताया कि कोहरे या धुंध की वजह से घटना नहीं होती, बल्कि वाहन की स्पीड अधिक करने से हादसे होते हैँ।
यूपी होकर दौड़ रही निजी बसें, इमरजेंसी गेट बाहर से खुलता
कार्यशाला में डा. बलूजा ने वीडियो दिखाया की आल इंडिया परमिट की 42 सीट वाली बस में 95 यात्री मिले थे, उसका गेट बाहर से खुलता था और गेट के सामने भी सीट लगी थी। बोले, इस पर कार्रवाई न करने वालों पर आखिर कब कार्रवाई होगी। अधिकांश बसें बिहार से दिल्ली जाने वाली यूपी होकर ही चलती हैँ। |