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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। दिव्यांगजनों की वास्तविक स्थिति के आकलन के लिए समग्र डाटा प्रणाली विकसित की जाएगी। पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र कश्यप की मौजूदगी में राज्य सलाहकार बोर्ड की सातवीं बैठक में इस विषय पर चर्चा की गई।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के निश्शुल्क आवागमन के लिए रोडवेज बसों में चार सीटें आरक्षित करने के शासनादेश का पालन किया जाए। मूकबधिर को लगाए जाने वाले काक्लियर इंप्लाट के रख-रखाव पर भी ध्यान दिया जाए।
योजना भवन में मंगलवार को आयोजित बैठक में नरेंद्र कश्यप ने कहा कि दिव्यांगजनों के पेंशन भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही स्वीकार्य नहीं की जाएगी। 11 लाख से अधिक दिव्यांगजनों को एक हजार रुपये प्रतिमाह (12 हजार रुपये वार्षिक) भरण-पोषण पेंशन दी जा रही है, जबकि वर्ष 2017 से पहले 300 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाती थी।
उन्होंने कहा कि 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) स्थापित करने का निर्णय लिया जा चुका है। जिससे दिव्यांगजनों को इलाज, उपकरण मरम्मत और परामर्श की सुविधा मिल सकेगी।
बैठक में नगर विकास विभाग को सभी शासकीय एवं सार्वजनिक भवनों, पार्कों, शौचालयों, अन्य सार्वजनिक स्थलों को दिव्यांगजनों के लिए पूरी तरह बाधारहित बनाने के निर्देश दिए गए। परिवहन विभाग से कहा गया कि रोडवेज बसों में दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील व्यवहार किया जाए।
आइटी और इलेक्ट्रानिक्स विभाग को सभी विभागीय वेबसाइटों को सुगम्य भारत अभियान के मानकों के अनुरूप दिव्यांगजन-अनुकूल बनाने के निर्देश दिए गए। शिक्षा विभागों को दिव्यांग बच्चों के सर्वेक्षण, विशेष शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में रैंप, लिफ्ट, बाधारहित शौचालयों की व्यवस्था करने के लिए कहा गया।
इसके अलावा नौकरी में चार प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, शिक्षण संस्थानों में पांच प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था का पालन करने के निर्देश दिए गए। बैठक में प्रमुख सचिव सुभाष चंद्र शर्मा सहित विभागों के अधिकारी मौजूद थे। |
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