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अपहरण में इस्तेमाल स्कॉर्पियो का नंबर फर्जी निकला।
जागरण संवादाता, जमशेदपुर। जमशेदपुर के प्रतिष्ठित युवा उद्यमी कैरव गांधी (24) के अपहरण को आज एक सप्ताह बीत चुका है। 192 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के पास इस सवाल का कोई ठोस जवाब नहीं है कि कैरव कहां है?
खाकी वर्दी का इस्तेमाल कर जिस शातिराना अंदाज में बिष्टुपुर के सुरक्षित सर्किट हाउस एरिया से यह किडनैपिंग हुई, उसने पूरे झारखंड की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिया खुफिया तंत्र पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
कैरव की मां की हालत चिंताजनक बनी हुई है और उन्हें निरंतर मेडिकल सपोर्ट पर रखा गया है। शहर का हर नागरिक इस समय कैरव की सुरक्षित घर वापसी की दुआ कर रहा है।
जांच का नया मोड़: नालंदा का \“साइबर और किडनैपिंग\“ सिंडिकेट
जमशेदपुर पुलिस की एसआईटी (SIT) और सीआईडी की टीमें अब बिहार के नालंदा जिले में डेरा डाले हुए हैं। जांच में पता चला है कि अपहरण में इस्तेमाल स्कॉर्पियो पर JH 12A 4499 नंबर प्लेट लगी थी। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, यह नंबर असल में एक पुरानी बोलेरो का है, जो नालंदा के राजगीर स्थित \“नई पोखर\“ के राजशेखर के नाम पर दर्ज है।
अपराधियों की रणनीति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह गाड़ी 1 नवंबर 2003 को खरीदी गई थी और इसका फिटनेस व टैक्स सालों पहले खत्म हो चुका है। पुलिस का मानना है कि जानबूझ कर ऐसी \“डेड व्हीकल\“ का नंबर इस्तेमाल किया गया ताकि डिजिटल डेटाबेस के जरिए उन्हें तुरंत ट्रैक न किया जा सके। नई पोखर इलाका अंतर्राज्यीय अपराधियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता है, जहाँ अब पुलिस की दबिश तेज हो गई है।
संदिग्ध गिरोह और हिरासत का दौर
पुलिस की एक टीम सरायकेला जेल में बंद कुछ बंदियों से भी पूछताछ कर रही है, क्योंकि संदेह है कि अपहरण की पटकथा जेल के भीतर लिखी गई हो सकती है। कुख्यात किडनैपिंग किंग चंदन सोनार और उसके सहयोगी अरविंद की तलाश में हजारीबाग, कोडरमा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में सर्च ऑपरेशन जारी है।
सोनारी से हिरासत में लिए गए सोनू और बिहार के हाजीपुर से पकड़े गए संदिग्धों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस \“लोकल इनफॉर्मर\“ के करीब पहुंचने की कोशिश कर रही है।
जनप्रतिनिधि आंदोलन की तैयारी में: NIA या CBI से जांच की मांग
कैरव गांधी की सकुशल वापसी को लेकर सियासी गलियारों में भी भारी हलचल है। दिग्गज नेताओं का कैरव के आवास पर पहुंचने का सिलसिला जारी है। केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने परिवार से मुलाकात के बाद कड़े शब्दों में कहा कि यह पूरी तरह से प्रशासनिक विफलता है।
पुलिस लिखी गाड़ी का बेखौफ इस्तेमाल होना बताता है कि अपराधियों के मन में कानून का कोई खौफ नहीं रह गया है। वहीं, जमशेदपुर के विधायक सरयू राय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर NIA या CBI से जांच कराने की मांग की है।
राय का तर्क है कि जब फिरौती के तार इंडोनेशिया (+62 कोड) और इंटरनेशनल कॉलिंग से जुड़े हों, तो राज्य पुलिस की सीमाएं आड़े आ जाती हैं। पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां ने भी डीजीपी से मुलाकात कर चेतावनी दी है कि यदि जल्द सफलता नहीं मिली, तो पूरे कोल्हान में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
व्यवसाइयों का आक्रोश: सुरक्षा नहीं तो निवेश नहीं
जमशेदपुर और आदित्यपुर के औद्योगिक जगत में इस घटना को लेकर गहरा डर और भारी गुस्सा देखा जा रहा है। इंडस्ट्रियल स्मॉल स्केल इंड्रस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने आपताकालीन बैठक की कर पुलिस-प्रशासन पर दबाव बनाने का फैसला लिया।
उद्यमियों का साफ कहना है कि अगर शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले पॉश इलाकों से दिन-दहाड़े कारोबारियों का अपहरण होगा, तो कोई भी नया निवेश यहां नहीं आएगा। आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के संगठनों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि अगले 24 घंटों में ठोस सुराग नहीं मिला, तो वे अपनी इकाइयों में काम ठप कर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
जांच में कहां रह गई कमी?
सात दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस की विफलता पर अब सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों और सूत्रों के अनुसार जांच में कुछ प्रमुख कमियां उभरकर आई हैं।
- बॉर्डर सीलिंग में देरी: घटना के तुरंत बाद शहर के एग्जिट पॉइंट्स और अंतर्राज्यीय सीमाओं (झारखंड-बिहार-बंगाल) को जिस मुस्तैदी से सील किया जाना चाहिए था, उसमें हुई देरी का फायदा उठाकर अपराधी सुरक्षित निकल गए।
- सीसीटीवी नेटवर्क का अभाव: बिष्टुपुर जैसे हाई-प्रोफाइल इलाके से चांडिल तक के रास्ते में कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरों का काम न करना या धुंधली फुटेज होना पुलिस के लिए बड़ी बाधा बना।
- इंटेलिजेंस फेलियर: चंदन सोनार जैसे कुख्यात अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने वाला लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) यह भांपने में नाकाम रहा कि शहर में कोई बाहरी गैंग रेकी कर रहा है।
- टेक्निकल ट्रेल: अपराधियों द्वारा वीओआईपी (VOIP) और विदेशी नंबरों का इस्तेमाल पुलिस के सर्विलांस सिस्टम को लगातार चकमा दे रहा है।
हम तकनीकी साक्ष्यों (Digital Footprints) के बेहद करीब हैं। नालंदा और कोडरमा में हमारी टीमें महत्वपूर्ण सुरागों पर काम कर रही हैं। कैरव की सकुशल वापसी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
-तदाशा मिश्रा, डीजीपी, झारखंड
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