फर्जी डिग्री कांड में मध्य प्रदेश पहुंची राजस्थान पुलिस (सांकेतिक तस्वीर)
जेएनएन, भोपाल/जयपुर। राजस्थान में सरकारी नौकरियों के लिए चल रहे फर्जी डिग्री और मार्कशीट के बड़े खेल को ध्वस्त करने के लिए राजस्थान पुलिस की स्पेशल आपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने भोपाल में बड़ी कार्रवाई की है।
एसओजी की टीम ने बुधवार को सीहोर से लेकर भोपाल के गांधीनगर, नर्मदापुरम और अरेरा कालोनी स्थित शिक्षण समूह और इसके चेयरमैन सुनील कपूर के ठिकानों पर दबिश दी। घंटों चली इस कार्रवाई से शिक्षण संस्थानों में हड़कंप मच गया।
राजस्थान एसओजी की पांच विशेष टीमें भारी पुलिस बल के साथ समूह से संबद्ध कालेज सत्यसांई, भोपाल के शिक्षण संस्थान, समूह के अधिकारी के निवास पर पहुंची। यूनिवर्सिटी का मुख्य गेट बंद कर स्टाफ व छात्रों की आवाजाही पर रोक दी गई।
परीक्षा सेल और प्रशासनिक ब्लॉक में उन महत्वपूर्ण और डिजिटल दस्तावेजों को खंगाले, जिनके जरिये फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां जारी किए जाने का संदेह है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन के मुकेश तिवारी और अंकित जोशी ने इसे एक सामान्य प्रक्रिया बताया है। उनका कहना है कि राजस्थान से शिक्षा विभाग की टीम दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के लिए आई है।
चेयरमैन सुनील कपूर के निवास पर तलाशी
राजस्थान पुलिस ने समूह के चेयरमैन सुनील कपूर के अरेरा कालोनी स्थित निजी निवास और उनके सीए के यहां भी छापे मारे है। पुलिस ने उनके घर की बारीकी से तलाशी ली और परिवार के सदस्यों से पूछताछ की।
2020 में हुई थी बड़ी धांधली
यह कार्रवाई राजस्थान में पीटीआइ भर्ती परीक्षा 2020 में हुई धांधली की जांच से जुड़ी है। जांच से जुड़े पुलिस सूत्रों का कहना है कि राजस्थान के कई अभ्यर्थियों ने सत्यसांई कालेज व अन्य से जारी डिग्रियां पेश की थीं, जबकि वे कभी पढ़ाई के लिए भोपाल नहीं आए।
आरोप है कि संस्थान ने भारी रकम लेकर बिना परीक्षा और उपस्थिति के बैकडेट (पुरानी तारीखों) में डिग्रियां बांटीं, जिनका उपयोग राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने के लिए किया गया। यह फर्जीवाड़ा 2013 से 2022 के बीच का है।
67 डिग्रियां फर्जी मिलीं
सीहोर-भोपाल रोड पर पचामा स्थित श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी से जारी 67 डिग्रियां फर्जी मिली हैं। राजस्थान एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश मेश्राम ने बताया कि यूनिवर्सिटी के आधिकारिक रिकार्ड और जांच में मिले दस्तावेजों में भारी विसंगतियां मिली हैं। 67 अभ्यर्थियों की डिग्रियां \“बैक डेट\“ में तैयार की गई थीं, ताकि उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जा सके। |
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