राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश के 21 जिलों के 64 ब्लाकों में शुरू होने जा रहे सर्वजन दवा सेवन (आइडीए) अभियान को सफल बनाने में अब स्कूलों की अहम भूमिका होगी। इसके तहत प्रार्थना सभा में बच्चों को फाइलेरिया के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी जाएगी, ताकि वे घर जाकर अपने परिवार के लोगों को भी जागरूक कर सकें।
10 फरवरी से शुरू होने वाले अभियान में तीन दवाएं खिलाई जाएंगी। जागरूकता के लिए वाद-विवाद, पोस्टर और पेंटिंग प्रतियोगिताओं का सहारा लिया जाएगा। जनजागरूकता रैली भी निकलेगी।
बुधवार को 21 जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) और खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) के साथ हुई वर्चुअल बैठक में यह संकल्प लिया गया। राज्य फाइलेरिया अधिकारी डा. एके चौधरी ने कहा कि अगर बच्चों को बीमारी और दवा की सही जानकारी मिल जाए, तो वे पूरे परिवार तक संदेश पहुंचा सकते हैं।
शिक्षकों से भी अपील की कि वे खुद दवा खाएं व बच्चों और ग्रामीणों को दवा सेवन के लिए प्रेरित करें। यह अभियान शाहजहांपुर, बलिया, बाराबंकी, उन्नाव, चित्रकूट, प्रतापगढ़, हरदोई, प्रयागराज, सोनभद्र, कौशांबी, अयोध्या, भदोही, लखनऊ, रायबरेली, अंबेडकरनगर, खीरी, पीलीभीत, औरैया, बांदा, फतेहपुर और बहराइच में चलाया जाएगा।
फाइलेरिया से बचाव के लिए दवा जरूरी
फाइलेरिया से बचाव के लिए दवा दी जाती है। बीमारी के बाद इलाज संभव नहीं है। दवा खाली पेट नहीं खानी चाहिए। दवा उच्च रक्तचाप, मधुमेह और गठिया से पीड़ित लोगों के लिए सुरक्षित है। फाइलेरिया के लक्षण 10 से 15 साल बाद सामने आ सकते हैं, इस दौरान संक्रमित व्यक्ति अनजाने में बीमारी फैला सकता है।
यह दवा व्यक्ति को सुरक्षित रखती है और आगे संक्रमण फैलने से रोकती है। यह दवा गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार लोगों और एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को छोड़कर सभी के लिए है। |