स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर लोगों में कई तरह की आशंकाएं हैं। प्रतीकात्मक फोटो
जागरण संवाददाता, मंडी। Smart Bijli Meter, सूचना प्रौद्योगिकी के युग में बिजली व्यवस्था भी स्मार्ट हो रही है। केंद्र सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत घरों में स्मार्ट और प्रीपेड ऊर्जा मीटर लगाए जा रहे हैं। राज्यों के प्रस्ताव पर देश में 20.33 करोड़ स्मार्ट मीटर स्वीकृत किए हैं। कई राज्य अपनी योजनाओं या बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के तहत भी स्मार्ट मीटर लगा रहे हैं। देश में 4.76 करोड़ स्मार्ट मीटर लग चुके हैं।
हिमाचल में 29 लाख मीटर लगेंगे
हिमाचल प्रदेश में 29 लाख स्मार्ट मीटर लगेंगे, अब तक 7,65,932 मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर से बिजली व्यवस्था पारदर्शी होगी, राजस्व बढ़ेगा और उपभोक्ताओं को सुविधाएं मिलेंगी।
मोबाइल पर मिलेगी सारी जानकारी
बिजली खपत, बिल, रिचार्ज, तकनीकी खराबी और भुगतान से जुड़ी सभी जानकारी मोबाइल फोन पर उपलब्ध होगी। माह की पहली तारीख को बिल मोबाइल एप पर मिलेगा। मोबाइल एप, आनलाइन पोर्टल, नेट बैंकिंग, कार्ड और यूपीआइ से भुगतान संभव होगा। इस कारण बिल वितरक अन्य कामों में लग सकते हैं व स्टाफ की कमी से जूझ रहे बिजली बोर्ड को राहत मिलेगी।
रीयल टाइम खपत पर नजर, ऊर्जा शुल्क पर 1.5 प्रतिशत छूट
स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को रीयल टाइम खपत की जानकारी मिलेगी। उपभोक्ता दैनिक आधार पर देख सकेंगे कि कितनी बिजली खर्च हो रही है और कितना बैलेंस बचा है। अचानक भारी बिल आने की समस्या खत्म होगी व बिजली खर्च पर नियंत्रण रहेगा। प्रीपेड मीटर से जितनी बिजली इस्तेमाल होगी, उतना ही भुगतान करना होगा। उपभोक्ताओं को ऊर्जा शुल्क पर वर्तमान में 1.5 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी।
तकनीकी खराबी की स्वतः सूचना
स्मार्ट मीटर से सब स्टेशन, लाइन या घर में किसी तरह की खराबी की जानकारी स्वतः सिस्टम में दर्ज हो जाएगी। शार्ट सर्किट, सप्लाई बाधित होने या मीटर में छेड़छाड़ जैसी घटनाओं की सूचना मिनटों में मिल जाएगी और शिकायत अपने आप दर्ज हो जाएगी। रिचार्ज होते ही तीन मिनट में सप्लाई बहाल हो जाएगी। रात व सार्वजनिक अवकाश में कनेक्शन नहीं कटेगा। उपभोक्ताओं को हर घटना पर एसएमएस, ईमेल व मोबाइल एप के माध्यम से अलर्ट मिलेंगे।
सही लोड का आकलन
स्मार्ट मीटर से घर के बिजली लोड का सही आकलन भी होगा। अक्सर लोग घरों का लोड टेस्ट रिपोर्ट में कम दर्शाते हैं, जबकि उपकरण अधिक क्षमता के होते हैं। इससे कम वोल्टेज की समस्या आती है। स्मार्ट मीटर से यह समस्या दूर होगी और यदि बोर्ड उपभोक्ताओं को सही लोड उपलब्ध नहीं कराता, तो उपभोक्ता मुआवजे का हकदार होगा।
उपभोक्ताओं की आशंका
स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल व आशंकाएं हैं। सबसे बड़ी चिंता गलत रीडिंग की है। पहले भी मीटर रीडिंग में गड़बड़ी से अधिक बिल आए हैं, ऐसे में तकनीकी खामी होने पर नुकसान तुरंत हो सकता है। प्रीपेड मीटर में बैलेंस खत्म होते ही बिजली कटने का डर भी परेशान कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क व इंटरनेट की समस्या भी बड़ी चुनौती है। कमजोर नेटवर्क के कारण रिचार्ज, बैलेंस जांच और शिकायत दर्ज कराने में दिक्कत आ सकती है। बुजुर्ग और तकनीक से कम परिचित लोगों के लिए मोबाइल एप का उपयोग आसान नहीं होगा। इसके अलावा, डेटा सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि कहीं खपत से जुड़ी निजी जानकारी का दुरुपयोग न हो।
हरियाणा का वीडियो कांगड़ा का बताकर किया प्रसारित
कांगड़ा जिले की एक युवती ने दुकानदार द्वारा रात को प्रीपेड मीटर में 1000 रुपये का रिचार्ज करने और सुबह 300 रुपये रहने का जो वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किया है वह जांच में हरियाणा का पाया गया है। हिमाचल में अभी कहीं पर भी प्रीपेड मीटर नहीं लगे हैं। सिर्फ स्मार्ट मीटर लगे हैं। प्रीपेड मीटर प्रथम चरण में सरकारी कार्यालयों व उद्योगों में लगेंगे।
स्मार्ट मीटर पूरी तरह पारदर्शी हैं और सुनिश्चित बिजली आपूर्ति का मात्र एक उपकरण हैं। इसके जरिए बिजली चोरी कम होगी और बिल भी कम आएंगे।
-अनुराग पराशर, सलाहकार बिजली बोर्ड।
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