किसान रजिस्ट्रेशन में वैशाली पूरे बिहार में अव्वल, आखिरी दिन बनाया रिकॉर्ड (AI Generated Image)
जागरण संवाददाता, हाजीपुर। वैशाली जिले ने सरकार बिहार सरकार संचालित संचालित किसान पंजीकरण महाअभियान में पूरे बिहार में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रशासनिक दक्षता का लोहा मनवाया है। अभियान के अंतिम दिन रिकॉर्ड 11,332 किसानों का पंजीकरण कर जिले ने यह गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल की।
यह सफलता केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बल्कि जिलाधिकारी वर्षा सिंह के नेतृत्व में प्रशासन की डोर-टू-डोर पहुंचने की प्रतिबद्धता का भी परिणाम है। अभियान के दौरान जिले में कुल 1,42,681 किसान पंजीकरण, 2,21,328 ई-केवाईसी तथा 2,14,562 पीएम-किसान पंजीकरण पूरे किए गए। इसके साथ ही कुल किसान पंजीकरण का प्रतिशत 66 तक पहुंच गया।
किसान पंजीकरण महाअभियान को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित न रखकर किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में सुनियोजित पहल के रूप में दो चरणों में संचालित किया गया। पहला चरण 6 से 11 जनवरी तक चला, जिसमें व्यापक जनभागीदारी के माध्यम से अभियान की मजबूत नींव रखी गई। इस चरण में भगवानपुर प्रखंड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अग्रणी भूमिका निभाई।
इसके बाद दूसरे चरण में अभियान को और अधिक गति, विस्तार और प्रभावशीलता मिली, जिसमें पातेपुर प्रखंड ने नेतृत्व करते हुए पंजीकरण की रफ्तार को नई ऊंचाई दी। दोनों चरणों की संयुक्त ऊर्जा और रणनीति ने इसे एक प्रभावी जनआंदोलन का रूप दिया।
इस उपलब्धि पर जिलाधिकारी ने कहा कि यह जीत एक संगठित तंत्र की है। कृषि, राजस्व और प्रखंड स्तर की टीमों ने एक परिवार की तरह काम किया। हमारा लक्ष्य केवल आंकड़ा छूना नहीं, बल्कि हर किसान को डिजिटल रूप से सशक्त कर उन्हें बिचौलियों से मुक्त करना था। वैशाली की यह सफलता अब प्रदेश के अन्य जिलों के लिए एक माडल बन गई है।
कोई किसान छूटे नहीं का संकल्प
यह अभियान केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहा। जब भीषण शीतलहर और कोहरे ने राह रोकी, तब भी प्रशासनिक तंत्र थमा नहीं। जिलाधिकारी के निर्देश पर महादलित टोलों और दुर्गम क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाए गए। खेतों और खलिहानों में अलाव जलाकर किसानों को एकत्र किया गया और उन्हें उनके डिजिटल अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।
टीम ने सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक फील्ड में रहकर यह सुनिश्चित किया कि कोई भी पात्र किसान तकनीकी या सामाजिक कारणों से छूट न जाए।
इस महाअभियान के दौरान प्रशासन ने एक संगठित और सक्रिय तंत्र के रूप में कार्य किया। जिला से लेकर फील्ड स्तर तक स्पष्ट जिम्मेदारी, तेज निर्णय और सतत समन्वय देखने को मिला। कृषि, राजस्व और प्रखंड स्तरीय टीमों के साथ जीविका दीदी, आंगनबाड़ी कर्मी, सीएससी और वसुधा केंद्रों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।
महिलाओं की भागीदारी बनी अभियान की ताकत
इस महाअभियान में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। स्वयं जिलाधिकारी के नेतृत्व में महिलाओं को आगे लाया गया, जिससे फेशियल रिकग्निशन आधारित पंजीकरण को लेकर उनकी झिझक दूर हुई। जिला, प्रखंड और फील्ड स्तर तक बड़ी संख्या में महिला किसान इस अभियान का चेहरा बनीं।
कैंपों के दौरान प्रशासनिक टीमें सुबह छह बजे से रात नौ बजे तक फील्ड में सक्रिय रहीं। लगातार समीक्षा बैठकें, फील्ड से सीधा फीडबैक और त्वरित निर्णयों ने तकनीकी और सामाजिक हर अड़चन का मौके पर समाधान सुनिश्चित किया।
Bतकनीक ने मिटाई किसान और व्यवस्था की दूरी
अभियान में तकनीक का उपयोग प्रभावी और सृजनात्मक ढंग से किया गया। केंद्रीकृत नियंत्रण कक्ष (आईसी3-इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर) के माध्यम से तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान किया गया। व्हाट्सएप आधारित समन्वय, वीडियो कांफ्रेंसिंग, डोर-टू-डोर पंजीकरण, ई-केवाईसी तथा पंचायत भवन, सीएससी और वसुधा केंद्रों के उपयोग ने प्रक्रिया को सरल, तेज और भरोसेमंद बनाया। |